हरिद्वार। गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए इस समय देश और विदेश में बड़ी बहस छिड़ी हुई है। कें द्र और राज्य सरकारों की ओर से कई ऐसी महत्वपूर्ण योजनाएं भी लागू की गई है जो गंगा को प्रदूषण से मुक्ति दिला सकें लेकिन अद्र्धकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अच्छी खबर है हरिद्वार में गंगा का जल स्नान के लिए पूरी तरह योग्य है। स्नान करने से कहीं कोई परेशानी नहीं होने वाली है। यह तथ्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कराई जा रही जांच में सामने आए हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से गंगा में प्रदूषण की मात्रा की जांच हर महीने कराई जा रही है। पिछले साल के दिसंबर माह के अंत में कराई गई जांच के दौरान हरकी पैड़ी के आसपास गंगा में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा 9 मिलीग्राम प्रति लीटर के आसपास पाई गई थी। इसके बाद 14-15 जनवरी को हुए अद्र्धकुंभ के पहले स्नान के बाद की गई जांच में यह जांचा गया कि लाखों श्रद्धालुओं के स्नान के दौरान गंगा में घुलित ऑक्सीजन की स्थिति क्या रही। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. अंकुर कंसल ने बताया कि इस दौरान गंगा में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा आठ से नौ मिलीग्राम प्रति किलोलीटर तक पाई गई है। सामान्य तौर पर स्वच्छ पानी में यह मात्रा 11 से 12 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई है। उन्होंने बताया कि आठ से नौ मिलीग्राम तक की मात्रा सामान्य तौर पर नहाने के लिए उपयुक्त है। अगर यह मात्रा पांच या छह मिली ग्राम तक होती है तो यह मानव शरीर के लिए नुकसानदायक होती है। इससे त्वचा संबंधी रोग और ऐसे पानी के पेट में चले जाने पर पेट संबंधी बीमारियां होने की भी आशंका रहती है। उन्होंने बताया कि इन आंकड़ों की पूरी रिपोर्ट बोर्ड के मुख्यालय को प्रेषित कर दी गई है।