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‘बोलने की आजादी का मतलब भावनाओं को चोट पहुंचाना नहीं’

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हरिद्वार पुलिस की गिरफ्त में शिया वक्फ बोर्ड यूपी के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र नार? - फोटो : HARIDWAR
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धर्मनगरी में आयोजित धर्म संसद में समुदाय विशेष के खिलाफ भड़काऊ भाषण की गूंज हरिद्वार से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच गई है। सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तराखंड सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। पुलिस की कार्रवाई मुकदमा दर्ज करने से आगे नहीं बढ़ सकी है। लेकिन अमर्यादित बयानबाजी करने वाले अब 16 जनवरी को प्रतिकार सभा कर मुकदमे और एसआईटी जांच के विरोध में सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
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हरिद्वार के वेद निकेतन में 17 से 19 दिसंबर तक हुई धर्म संसद में दिए गए भड़काऊ भाषणों की देशभर में आलोचना हो रही है। लेकिन वोट बैंक की रजनीति के चलते हरिद्वार और प्रदेश के राजनीतिक दलों के नेताओं ने चुप्पी साध ली है। नेताओं की खामोशी के बीच समाज का ही प्रबुद्ध वर्ग भड़काऊ भाषणों की आलोचना कर रहा है। उनका मानना है कि समाज में नफरत का जहर घोलना निंदनीय है। इसे किसी कीमत पर बरदाश्त नहीं किया जाना चाहिए। एक लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में इनके हौसले बढ़ेंगे। नफरत फैलाने वाले किसी भी धर्म एवं संप्रदाय के क्यों न हों, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
धर्म संसद में की गई बयानबाजी संविधान के अनुरूप नहीं है। लोकतंत्र में हमें बोलने की आजादी दी गई है, परंतु उसका मतलब यह नहीं होना चाहिए कि हम कुछ भी कभी भी किसी को कह दें। संतों के श्रीमुख से हम आज तक मधुर और आपसी सामंजस्य बनाने वाले शब्द सुनते आए हैं। ऐसी बातें जो धर्म संसद में कहीं गई, मन को अच्छी नहीं लगती।
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- मुस्कान मलिक, छात्र एलएलबी
भारतीय संस्कृति स्वाभिमान के साथ सर्वधर्म धर्म समभाव को लेकर परिलक्षित होती है। जिसमें सर्वे भवंतु सुखिन: सर्वे संतु निरामया विश्व कल्याण की भावना को लेकर आगे बढ़ती है। अत: हमें अपनी गरिमा को बनाए रखना है। किसी भी मंच पर ऐसे विचार नहीं रखने चाहिए जो दूसरों की भावनाओं को आघात करें।
- रश्मि मोंगा, प्रांतीय आख्या प्रभारी भारत विकास परिषद
भड़काऊ भाषण किसी भी रूप में देश, समाज, संविधान और मानव संसार के लिए ठीक नहीं हैं। दुश्मन देशों की तरह अपने ही लोगों का कत्ल करने की धमकी देने वाले किसी के हितैषी नहीं हो सकते हैं। भड़काऊ भाषण देने वालों पर तुरंत लगाम लगनी चाहिए और कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
- प्रो. एसएस देव, विभागाध्यक्ष अंग्रेजी गढ़वाल विवि श्रीनगर
हिंदुत्व जागरण के लिए जो धर्म संसद की गई थी उसका भाव गलत नहीं था। वह संतों की धर्म संसद थी और धर्म से जुड़े मुद्दों पर उन्होंने मंथन किया। समुदाय विशेष के नरसंहार जैसी बात नहीं होनी चाहिए। इससे समुदाय विशेष को आघात पहुंच सकता है।
- सचिन सैनी, युवा
युवाओं को गलत के खिलाफ खड़ा होना होगा : रुचिका
जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी यति नरसिंहानंद के खिलाफ समुदाय विशेष की महिलाओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाने वाली रुचिका किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़ी है। रुचिका लॉ की तृतीय वर्ष की छात्रा है। रुचिका के मुताबिक उसे फेसबुक के माध्यम से पता लगा कि स्वामी यति नरसिंहानंद ने समुदाय विशेष की महिलाओं पर अमर्यादित टिप्पणी की, जो पूरी तरह से गलत और असांविधानिक है। देश का कानून किसी भी वर्ग की महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्प्णी या अभद्र भाषा की इजाजत नहीं देता है। संविधान ने महिलाओं को बराबरी का दर्जा दिया है। महिलाओं का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। रुचिका ने कहा कि युवाओं को गलत के खिलाफ खड़ा होना होगा, ताकि बेहतर समाज का निर्माण हो सके।
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