हरिद्वार। मोटर अधिनियम में दर्ज वाद के निस्तारण के लिए रोशनाबाद न्यायालय की फर्जी मोहर, पीठासीन अधिकारी के हस्ताक्षर व पदनाम में कूटरचना कर फर्जी चालान रसीद जारी करने का मामला सामने आया है। वरिष्ठ लिपिक ने इस प्रकरण में पीआरडी कर्मचारी आरिफ के खिलाफ सिडकुल थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, न्यायालय के वरिष्ठ लिपिक कृष्णपाल की ओर से सिडकुल थाने में तहरीर दी गई। बताया कि 13 जून को एक चालान रसीद न्यायालय के नाम पर तैयार की गई, जिसमें पीठासीन अधिकारी के हस्ताक्षर, मोहर और पदनाम का इस्तेमाल किया गया था। जब इस रसीद की पुष्टि के लिए न्यायालय के रिकॉर्ड से मिलान किया गया तो यह स्पष्ट हुआ कि ऐसी कोई रसीद बुक न्यायालय से जारी ही नहीं की गई थी। न्यायालय प्रशासन ने आरटीओ कार्यालय को पत्र भेजा। निर्देश दिए कि अदालत के आदेश के बिना किसी भी वाहन को ब्लैकलिस्ट से हटाने की प्रक्रिया न की जाए।
जांच में यह भी सामने आया कि पीआरडी कर्मी आरिफ ने वाद मोटर वाहन अधिनियम के निस्तारण के लिए 2500 रुपये की रसीद जारी की है। सिडकुल पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचना समेत संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। थाना प्रभारी निरीक्षक मनोहर सिंह भंडारी ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है।