प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कवायद पर वन विभाग ने ‘ब्रेक’ लगा दिया है। करीब साल भर पहले जिस मॉडल डिग्री कॉलेज का एक साल पहले ऑनलाइन शिलान्यास किया था, वह अभी तक कागजों से बाहर नहीं निकल पाया है। दरअसल, मॉडल कॉलेज जिस जमीन पर बनाया जाना था, उस पर वन विभाग ने अपना दावा करते हुए काम रुकवा दिया। कई बार पत्राचार के बाद भी आज तक प्रशासन इस जमीन की पैमाइश नहीं करा पाया है।
मॉडल डिग्री कॉलेज हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्रांतर्गत लालढांग के पास रसूलपुर मिट्ठीबेरी गांव में खोला जाना था। पिछले साल मई में तत्कालीन सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक और उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत की मौजूदगी में मॉडल डिग्री कॉलेज का शिलान्यास किया गया था।
ऑनलाइन शिलान्यास खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल तीन फरवरी को किया था। उस वक्त दावे किए गए थे कि मॉडल डिग्री कॉलेज सुपर संस्थान होगा। इसमें न केवल पढ़ाई की बेहतरीन व्यवस्था होगी, बल्कि लैब, आवासीय परिसर आदि सब कुछ हाईटेक होगा। ब्रिडकुल को इस संस्थान की निर्माण एजेंसी बनाया गया था।
लेकिन सारे दावे हवाई साबित हुए। सच यह है कि जिस जमीन को यह डिग्री कॉलेज बनाने के लिए चुना गया है, उस पर तीन इकाइयों का स्वामित्व है। एक बड़ा हिस्सा वन विभाग का है, कुछ हिस्सा ग्राम समाज की भूमि है और एक हिस्से पर एक निजी व्यक्ति का स्वामित्व है। जिला प्रशासन ने भूमि का चयन इस भूखंड को ग्राम समाज की भूमि मानकर किया था लेकिन शिलान्यास के बाद काम शुरू होते ही वन विभाग के अधिकारियों ने भूमि को अपना बताकर काम रुकवा दिया। तब से ब्रिडकुल के अधिकारी कभी शासन में, कभी वन विभाग के दफ्तरों में तो कभी जिला प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं।
वन भूमि पर नहीं हो सकता निर्माण
हरिद्वार। डीएफओ आकाश वर्मा ने बताया कि ब्रिडकुल के अधिकारी जिस स्थान पर निर्माण कार्य करना चाहते हैं, वह वन विभाग की भूमि है। नियमानुसार इस भूमि पर कोई निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता। उसके लिए लैंड यूज बदलना होगा। अधिकारियों को इस बारे में बता दिया गया है।
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संबंधित जमीन की पैमाइश के लिए प्रार्थना-पत्र मिला था। इस बारे में आदेश भी कर दिए गए हैं। पैमाइश क्यों नहीं हुई, इस बारे में दिखवाया जाएगा।
कुश्म चौहान, एसडीएम, हरिद्वार।
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40 किलोमीटर तक नहीं है कोई डिग्री कॉलेज
मॉडल डिग्री कॉलेज के लिए लालढांग क्षेत्र को इसलिए चुना गया था क्योंकि यहां हरिद्वार से लेकर चिड़ियापुर तक करीब 40 किलोमीटर तक एक भी सरकारी डिग्री कॉलेज नहीं है। इससे खास तौर पर बेटियाें को दिक्कत होती है, क्योंकि इंटर के बाद घर वाले उन्हें ज्यादा दूर पढ़ने के लिए नहीं भेजते। कुछ बच्चे कोटद्वार पढ़ने जाते हैं तो कुछ हरिद्वार आते हैं।