पथरी। नसीरपुर कलां में 45 साल बाद भी चकबंदी प्रक्रिया समाप्त नहीं होने के कारण किसानों को परेशानी उठानी पड़ रही है। किसानों ने डीएम मयूर दीक्षित से हस्तक्षेप कर चकबंदी प्रक्रिया समाप्त कराने की मांग की है।
गांव के किसानों को खसरा खतौनी की नकल लेने के लिए करीब पैंतीस किलोमीटर दूर रुड़की में चकबंदी कार्यालय में जाना पड़ता है। इससे किसानों का समय और पैसा अधिक खर्च हो रहा है। किसान साजिद अली, दिलशाद, प्रमोद शर्मा, सोनू कुमार के मुताबिक नसीरपुर कलां में सन 1982 में चकबंदी प्रक्रिया शुरू हुई थी। चकबंदी विभाग ने 1992 में किसानों के चक आवंटित कर दिए थे। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद भी संबंधित अधिकारियों ने चकबंदी प्रक्रिया खत्म करने में कोई दिलचस्पी नहीं ली है। किसानों का कहना है कि अगर जल्द ही समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वह धरना प्रदर्शन करने पर मजबूर होंगे।