निजी स्कूलों का नया सत्र प्रारंभ होते ही कॉपी और किताबों पर कमीशन का खेल भी शुुरू हो चुका है। दरअसल, निजी स्कूलों ने सब शैक्षिक सामग्री के लिए एक-एक दुकानें निर्धारित कर दी हैं। जिससे शैक्षणिक सामग्री खरीदने के लिए दुकानों से अभिभावक की लंबी-लंबी लाइन लगाकर लुट रहे हैं।
स्कूलों में शिक्षा का नया सत्र शुरू हो चुका है। निजी स्कूलों की ओर से कॉपी-किताबों से लेकर ड्रेस, बैग के लिए गिनी-चुनी दुकानें तय कर दी हैं। जिससे अभिभावकों से दुकानदार मनमाने दाम वसूले रहे हैं। गिनती की दुकान होने से अभिभावकों को पाठ्यक्रम समेत अन्य शिक्षण सामग्री खरीदने के लिए पसीना अलग से बहाना पड़ रहा है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए दुकानदारों को कर्मचारियों को लगाना पड़ रहा है। खास बात यह है कि ड्रेस सर्दी की या गर्मी की हो, दुकान वाले के पास दाम पूछने पर जवाब भी रेट की तरह फिक्स हैं। कोई मोलभाव नहीं है। ऐसा ही किताबों और अन्य स्टेशनरी में भी है।
बताया जाता है कि ड्रेस के एक पीस पर स्कूल के मालिक को 50 से 100 रुपये तक का कमीशन सीधा-सीधा जा रहा है। बाकी किताबों और स्टेशनरी पर भी बंधा हुआ है। कहीं-कहीं तो बाकायदा बोर्ड भी लगा रखे हैं कि मोलभाव करके अपना और हमारा वक्त खराब न करें।
बोले अभिभावक
शिक्षा के नाम पर प्राइवेट संस्थान खुली लूट मचाए हुए हैं। अभिभावकों को एक ही दुकान से किताबें और स्टेशनरी के सामान से लेकर स्कूली ड्रेस को लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
- दीपा
सरकार और अधिकारी प्राइवेट संस्थानों की ओर से की जा रही मनमानी पर रोक लगाने का कोई भी कारगर तरीका नहीं अपना रहे हैं। सरकार को निजी स्कूलों की इस मनमानी पर नियंत्रण लगाना चाहिए।
- गीता देवी
सभी स्कूलों की काफी, किताबों से लेकर ड्रेस आदि सभी दुकानों पर मिलने के लिए नियम बनाए जाएं। ताकि अभिभावकों को निजी स्कूलों की मनमानी से राहत मिल सके।
- गोविंद सिंह
निजी स्कूलों ने नया सत्र शुरू होते ही अभिभावकों को लुटना शुरू कर दिया है। अब सालभर तक यही खेल चलता रहेगा। शिक्षा विभाग के अधिकारी पर इस पर कार्रवाई करनी चाहिए।
- पंकज कुमार
निजी स्कूलों की कॉपी-किताबों से लेकर ड्रेस एक-एक दुकान से मनमाने दाम से वसूलने की यदि लिखित में एक भी अभिभावक शिकायत करता है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- एसपी सेमवाल, मुख्य शिक्षा अधिकारी हरिद्वार