नगर निगम प्रशासन के तमाम दावों और हर महीने लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी शहर में 60 वार्डों से घर-घर से कूड़ा उठाने की योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। दो-दो सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट कंपनियों के काम करने के बाद भी कूड़ा उठाने के काम में पहले की तुलना में कोई सुधार नहीं हुआ। यही कारण है कि अब भी शहर के कई इलाकों में गंदगी के ढेर लगे रहते हैं। कूड़ा वाहन संकरी गलियों में नहीं पहुंच पाते और कूड़ा ले जाने वाले रिक्शा एक ही चक्कर में जवाब दे जाते हैं।
नगर निगम ने शहर की सफाई व्यवस्था के लिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी कासा ग्रीन और केएल मदान के साथ अनुबंध किया हुआ है। हर महीने दोनों कंपनियों को करीब 30-30 लाख रुपये का भुगतान किया जाता है। लाखों रुपये बहाने के बाद भी शहर की सफाई व्यवस्था नहीं सुधर रही। 30 वार्डों में कासा ग्रीन तो 30 में केएल मदान घर-घर से कूड़ा एकत्र करने का कार्य करती है। कई वार्डों में अभी भी पूरी तरह डोर-टू-डोर कलेक्शन शुरू नहीं हो पाया है। जहां ये व्यवस्था चल रही है वहां अब पटरी से उतरने लगी है।
पिछले काफी समय से वार्डों में कूड़ा कलेक्शन का कार्य सही ढंग से नहीं हो पा रहा है। कहीं दिनभर कूड़ा नहीं उठता तो कहीं समय से नहीं सफाई नहीं होती है। ज्वालापुर क्षेत्र के वार्डों की हालत ज्यादा खराब है। चौहानान, हज्जाबान, कस्साबान, पांवधोई और जगजीतपुर के अलावा उत्तरी हरिद्वार के कई क्षेत्रों में भी यही हाल है। कंपनियों की हीलाहवाली से नगर निगम की छवि भी धूमिल हो रही हैं।
सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है। कभी भी समय पर कूड़ा नहीं उठता है। दोपहर तक कूड़े के अंबार लगते रहते हैं। डोर-टू-डोर कूड़ा भी नहीं उठता है।
- शाहिद अहमद, स्थानीय निवासी
नगर निगम ने सफाई के लिए दो-दो कंपनियों से अनुबंध तो कर लिया। लेकिन कंपनियों की हीलाहवाली के चलते बदहाल सफाई व्यवस्था की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
- एमएस वर्मा, स्थानीय निवासी
शहर की सफाई व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए काफी काम करने की जरूरत है। सफाई के नाम पर लाखों रुपये हर महीने खर्च होते हैं लेकिन फिर भी शहर के अधिकांश इलाकों में स्थिति बदहाल है।
- विकास सिंह, स्थानीय निवासी
कई क्षेत्रों से सफाई व्यवस्था को शिकायतें मिली हैं। कंपनियों के अधिकारी हरिद्वार से बाहर हैं। लौटने पर उन्हें सुधार के लिए हिदायत दी जाएगी। फिलहाल नगर आयुक्त और कंपनियों के अधिकारियों को पत्र भी लिख रहे हैं।
- अनीता शर्मा, मेयर हरिद्वार