हरिद्वार। गंगा प्रदूषण एवं अनुरक्षण इकाई पेयजल निगम के एक सहायक अभियंता की ओर से मातृ सदन के नजदीक बह रहे गंदे नाले को लेकर अपने अधिकारियों को भ्रामक रिपोर्ट भेजने पर मातृ सदन के संत नाराज हैं।
मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद ने जेई को निलंबित करने और उनकी चल अचल संपत्ति की जांच कराने की मांग की है। शनिवार को पत्रकारों से वार्ता करते हुए स्वामी शिवानंद ने कहा कि जगजीतपुर में उनके आश्रम से कुछ दूरी पर एक गंदा नाला बह रहा है।
उस नाले को टेप कराने के लिए उन्होंने दिसंबर 2004 में एचडीए के उपाध्यक्ष को पत्र लिखा था। फिर एक जनवरी 2005 को पत्र लिखा। तीसरा पत्र तत्कालीन जिलाधिकारी और गंगा प्रदूषण एवं अनुरक्षण इकाई पेयजल निगम के परियोजना प्रबंधक को भेजा था। जिस पर परियोजना प्रबंधक की ओर से यह जवाब दिया गया था कि उस नाले को टेप करने में करीब दो साल का वक्त लगेगा लेकिन दो साल की बजाय 11 साल हो गए लेकिन गंगा प्रदूषण एवं अनुरक्षण इकाई पेयजल निगम की ओर से नाले को टेप नहीं किया गया।
बल्कि इसके उलट गंगा प्रदूषण एवं अनुरक्षण इकाई पेयजल निगम के सहायक अभियंता पीके अग्रवाल की ओर से अपने परियोजना प्रबंधक को जो रिपोर्ट भेजी गई उसमें यह उल्लेख किया गया है कि मातृ सदन नाले को टेप नहीं करवाने दे रहा है। स्वामी शिवानंद ने कहा कि मातृ सदन गंगा की रक्षा के लिए संघर्ष करता आया है। एक जिम्मेदार कर्मचारी की ओर से अपने अधिकारी को भेजी गई भ्रामक खबर की वह निंदा करते हैं।