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24 साल बाद मिला इंसाफ: नाम में चूक की वजह से फंस गए पुलिसकर्मी

Wed, 11 Mar 2020 11:42 PM IST
देहरादून ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
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24 बाद परिवार को मिला इंसाफ - फोटो : Twitter
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बेटे के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए दिन-रात एक कर देने वाले कनखल निवासी समाजसेवी डॉ. कैलाश खन्ना को इंसाफ पाने में 24 साल का लंबा समय लग गया। इस बीच उन्होंने थाने से लेकर मंत्रियों के दफ्तरों और कोर्ट तक चक्कर काटे। डॉ. खन्ना के मुताबिक कनखल के ही राजेश भारद्वाज के खिलाफ उन्होंने फर्जी ड्रग लाइसेंस की शिकायत की थी। इसी की पैरवी करने पर राजेश भारद्वाज उनसे रंजिश रखता था। लोकल पुलिस के ही कुछ लोगों के इस मामले में शामिल होने के कारण जांच में लीपापोती की जा रही थी।

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हत्या के दो साल बाद सीजीएम न्यायालय के आदेश पर इस केस को सीबीसीआईडी को सौंपा गया। इंस्पेक्टर आरडी गौड़ और जितेंद्र कुमार ने 1999 में राजेश भारद्वाज और पुलिसकर्मियों के विरुद्ध हत्या और साजिश का मुकदमा दर्ज कराया। अभियुक्तों ने मुकदमे के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण ली। इसी में डॉ. खन्ना के दो साल चले गए। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद 2003 तक नैनीताल हाई कोर्ट में पैरवी हुई। यहां से अभियुक्तों की अपील खारिज हो गई। विशेष लोक अभियोजन अधिकारी अमरीश कुमार और शासकीय अधिवक्ता नीरज गुप्ता की दमदार पैरवी भी एक वजह थी, जिससे दोषियों को सजा हो सकी।

बुगला को जुगला लिखकर फंस गए पुलिसकर्मी

कनखल निवासी पंकज खन्ना की हत्या के जिस मामले में सेवानिवृत्त सीओ एमआर दुग्ताल सहित छह लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। इस केस में पुलिस की लापरवाही पहले दिन से ही उजागर हुई। एक जून 1996 को पंकज खन्ना की हत्या की गई थी। इससे एक हफ्ते पहले 25 मई 1996 को कनखल के मोहल्ला शेखुपुरा निवासी नितिन के घर पर कुछ लोगों ने फायरिंग की थी। इस मामले में डॉ. कैलाश खन्ना का बेटा विवेक उर्फ जुगला गवाह था।
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पीड़ित पक्ष ने इस मामले में पुलिस को तहरीर दी, लेकिन पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। पुलिस ने एक जून को देर शाम फायरिंग के मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया। इसके कुछ देर बाद ही अपने मेडिकल स्टोर पर बैठे पंकज खन्ना की हत्या कर दी गई। डॉ. कैलाश खन्ना बताते हैं कि पुलिस ने फायरिंग करने के मामले में जो मुकदमा दर्ज किया, उसमें गवाह विवेक खन्ना उर्फ जुगला के बजाय बुगला लिख दिया, जो कि पंकज खन्ना का नाम था। कुछ देर बाद ही पंकज खन्ना की हत्या कर दी गई।

ऐसा माना गया कि वे हत्या तो जुगला की करने आए थे, नाम की वजह से हत्या बुगला की कर दी। बाद में जब कोर्ट में पुलिस से जवाब-तलब किया गया तो उसने रजिस्टर में बुगला के बजाय कूट संरचना कर जुगला कर दिया। इसी वजह से पुलिसकर्मी फंस गए।
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