राजनीतिक दलों और मतदाताओं के साथ साथ इन दिनों सरकारी दफ्तरों पर भी चुनाव हावी हो गया है। अधिकारी बैठकों में व्यस्त हैं तो लिपिक सहित निचले कर्मचारी बीएलओ ड्यूटी कर रहे हैं। हाल यह है कि दफ्तरों में सन्नाटा पसरा हुआ है। नगर निगम, तहसील, पूर्ति विभाग जैसे जनता से सीधे जुड़े विभागों में गृहकर नामांतरण, जाति, आय, मूल निवास आदि प्रमाण पत्रों के लिए फरियादी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
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नगर निगम में टाइम पास कर रहे कर्मचारी
फाइलों पर कुंडली मारने के लिए बदनाम नगर निगम के हालात आज कल ज्यादा खराब हैं। नगर आयुक्त और सहायक नगर अधिकारी सहित कर अधीक्षक चुनाव की बैठकों में व्यस्त हैं। जबकि कुछ लिपिकों की बीएलओ के तौर पर ड्यूटी लगी है। बाकी बचे लिपिकों में इक्का दुक्का ही अपनी सीट पर बैठ रहे हैं। बाकी लिपिक और निचले कर्मचारी दफ्तरों के बाहर धूप में टाइम पास कर ड्यूटी निभा रहे हैं। खासकर अधिकांश महिला कर्मचारी अपने अपने दफ्तरों के बाहर कुर्सियां डालकर समय काटती हैं।
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फरियादियों के साथ पुलिस भी लौटी निराश
हरिद्वार। नगर निगम में आम फरियादियों के साथ साथ सोमवार को पुलिस को भी निराशा हाथ लगी। उत्तरी हरिद्वार में संपत्ति की धोखाधड़ी के एक मुकदमे में खड़खड़ी चौकी प्रभारी रंजीत सिंह तोमर को नगर निगम से सुबूत के तौर पर कुछ दस्तावेजों की जरूरत थी। इसके लिए नगर आयुक्त को चिट्ठी भी भेजी गई थी। चिट्ठी का जवाब न मिलने पर सोमवार को तोमर खुद नगर निगम पहुंचे। लेकिन यहां आकर पता चला कि खड़खड़ी क्षेत्र के बाबू बीएलओ ड्यूटी में हैं।
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तहसील मेें कहीं दफ्तर बंद तो कहीं अफसर नदारद
हरिद्वार। तहसील में कहीं दफ्तर में ताला लटका मिला तो कहीं दफ्तर खुला होने पर भी अफसर कुर्सी से नदारद मिले। जानकारी लेने पर हर तरफ से एक ही जवाब मिला कि साहब मीटिंग में गए हैं। कई फरियादी भी अपने काम के लिए हाथ में दस्तावेज लेकर साहब को ढूंढते नजर आए। चांदपुर निवासी मेहरबान, कटारपुर के अनिल ने बताया कि तीन दिन पहले भी नायब व तहसीलदार नहीं मिल पाए थे।
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पूर्ति विभाग पर खानपान का जिम्मा
चुनाव के संबंध में बड़ी बैठकों से लेकर मतदान और मतगणना तक में खानपान का पूरा जिम्मा पूर्ति विभाग पर रहता है। ऐसे में पूर्ति विभाग में भी अफसर और कई लिपिक दफ्तर में नहीं बैठ पा रहे हैं। राशन कार्ड के लिए आने वाले फरियादियों को काम कराने के लिए कई चक्कर काटने पड़ रहे हैं। अक्सर अधिकारियों और कर्मचारियों के मीटिंग में होने की जानकारी मिलने पर खाली हाथ लौटना पड़ता है।