हरिद्वार। फिजियोथैरेपी सेंटर चलाने वाले डा. अनिल तोमर की हत्या यूपी पुलिस के रिटायर्ड सिपाही ने अपने नौकर के साथ मिलकर की थी। इसके बाद अपनी बेटी की मदद से डाक्टर का शव कार के अंदर ही जला दिया था। पुलिस ने रिटायर्ड सिपाही को नौकर और बेटी सहित गिरफ्तार कर लिया। एसएसपी राजीव स्वरूप ने बुधवार को ज्वालापुर कोतवाली में हत्याकांड का खुलासा किया।
शंकर आश्रम के पास फिजियोथैरेपी सेंटर चलाने वाले डा. अनिल तोमर का पूरी तरह जला हुआ शव बीते 30 मई को बहादराबाद नहर पटरी से उनकी कार से बरामद हुआ था। कार अंदर से पूरी तरह जलने और शव कंकाल के रूप में मिलने से बमुश्किल शिनाख्त हो पाई थी। एसपी सिटी नवनीत सिंह भुल्लर के निर्देशन और सीओ सदर जेपी जुयाल के नेतृत्व में बहादराबाद पुलिस व एसओजी की टीम हत्या के खुलासे में जुटी थी। जांच पड़ताल में सीसीटीवी फुटेज में कुछ सुराग हाथ लगने पर एसओ बहादराबाद अमर चंद्र शर्मा व एसओजी प्रभारी नरेंद्र सिंह बिष्ट ने बुधवार को एक युवती समेत तीन लोगों को हिरासत में लिया। पूछताछ करने पर आरोपी जनमेद सिंह भदौरिया निवासी साधु बेलापुरम पेट्रोल पंप के सामने हरिपुर कलां और उसकी बेटी दुर्गेश व रायवाला प्रतीक नगर निवासी उनके नौकर रविपाल पुत्र प्रेमपाल ने डा. अनिल तोमर की हत्या कुबूल की।
एसएसपी राजीव स्वरूप ने बताया कि छह साल पहले जनमेद सिंह की बेटी दुर्गेश के रिश्ते की बात डा. अनिल तोमर से चली थी। किसी कारण से रिश्ता नहीं हो पाया। इसके बावजूद डाक्टर तोमर व दुर्गेश का मिलना जुलना व जनमेद के घर आना जाना था। ये बात जनमेद को पसंद नहीं थी। घटना की रात करीब पौने दो बजे जनमेद अपना ढाबा बंद कर जब नौकर रविपाल के साथ घर लौट रहा था, तब डाक्टर अनिल तोमर को अपने घर के समीप कार में देखकर वह आगबबूला हो गया। दोनों के बीच झगड़ा हुआ। जनमेद और रविपाल ने मिलकर अनिल तोमर का गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद वह अपनी बेटी को बुलाकर ले आया और लाश ठिकाने लगाने की योजना बनाई। डाक्टर अनिल तोमर की लाश कार में डालकर निकल गया। बेटी दुर्गेश और नौकर रविपाल स्कूटी पर पीछे पीछे चल दिए। रानीपुर झाल के पास पेट्रोल डालकर कार में ही शव को जला दिया और वापस लौट आए।
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सीसीटीवी फुटेज से खुला हत्या का राज
पड़ताल के दौरान सीसीटीवी फुटेज से पुलिस को खुलासे में मदद मिली। घटना की रात चंडीघाट सहित कई जगह डाक्टर की कार सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दी थी। कार के पीछे पीछे स्कूटी पर एक युवक-युवती जाते हुए भी नजर आए। शाम के समय सेंटर बंद करने के बाद से और तड़के तक कार चंडीघाट के पास सीसीटीवी में नजर आने से पुलिस के लिए ये पता लगाना जरूरी था कि इतने घंटे तक डाक्टर आखिर कहां रहे। फुटेज व सुराग जुटाने के बाद जब रविपाल से पूछताछ की गई तो चेहरे पर कई जगह झुलसने के निशान पाए गए। इससे पुलिस का शक यकीन में बदल गया और सख्ती से पूछताछ में आरोपियों ने सिलसिलेवार पूरी कहानी बता दी।
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आगरा का रहने वाला है परिवार
डा. अनिल तोमर की हत्या करने वाला जनमेद सिंह भदौरिया का परिवार मूल रूप से आगरा यूपी की तहसील बाह में ग्राम कुहारी का रहने वाला है। पुलिस के मुताबिक वर्ष 1965 से 80 तक जनमेद फौज में सिपाही रहा। इसके बाद सन 1981 में उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही भर्ती हो गया। रिटायर्ड होने के बाद वह हरिपुर में आ बसा। काफी दिन से उत्तरी हरिद्वार में अपना ढाबा चला रहा था।
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पुलिस टीम को शाबाशी व इनाम
एसएसपी राजीव स्वरूप ने ब्लाइंड केस को खोलने वाली पुलिस व एसओजी टीम को शाबाशी देते हुए 2500 रुपये इनाम देने की घोषणा की। टीम में बहादराबाद थाना प्रभारी अमर चंद्र शर्मा, एसओजी प्रभारी नरेंद्र सिंह बिष्ट, बहादराबाद थाने से उपनिरीक्षक मंसूर अली, एसओजी उपनिरीक्षक प्रदीप रावत, बहादराबाद से सिपाही प्रेम सिंह, दीपक राम, रियाज अली, मीना गौड़, एसओजी हेडकांस्टेबल सुंदर लाल, सिपाही हरवीर रावत, उमेश व शशिकांत शामिल रहे।