शहर की पेयजल व्यवस्था नहीं सुधरने और लाइनों के लीकेज ठीक नहीं होने पर जिलाधिकारी सी. रविशंकर ने शनिवार को आपात बैठक बुलाकर अधिकारियों के पेच कसे। उन्होंने पेयजल की शिकायत दर्ज करने और तत्काल उसको दूर करने के साथ हर रोज शाम को दिनभर के कामकाज की रिपोर्ट देने के निर्देश दिए है। जिलाधिकारी ने अमृत योजना के काम में लापरवाही पर खासी नाराजगी जताई और अधिशासी अभियंता को फील्ड में रहने का निर्देश दिया।
शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने 7 जून को समीक्षा बैठक की थी। लीकेज ठीक नहीं करने और पेयजल आपूर्ति में सुधार नहीं होने 48 घंटे बाद डीएम को अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिया था। पांच दिन बाद भी स्थिति जस की तस बनी होने पर अमर उजाला ने इस समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
अमर उजाला की खबर का संज्ञान लेकर डीएम ने शनिवार को अधिकारियों की आपात बैठक बुलाई। जिलाधिकारी ने अमृत योजना अधिकारी को निर्देश दिए कि वह योजनानुसार जोनवार पेयजल लाइनों में वॉल्ब लगाने का काम तेजी से पूरा करें। वॉल्ब लगने से यह फायदा होगा कि जिस क्षेत्र व गली, मोहल्ले में लीकेज की समस्या होगी उसको ठीक करने के लिए पूरे क्षेत्र की जलापूर्ति बंद नहीं करनी पड़ेगी। जिस लाइन में लीकेज होगी उसी का वॉल्ब बंद कर लाइन ठीक की जाएगी। बैठक में जिलाधिकारी के संज्ञान में लाया गया कि अमृत योजना का अधिशासी अभियंता रुड़की में बैठते हैं और परियोजना का काम एक जेई के भरोसे छोड़ रखा है। उन्होंने निर्देश दिया कि जहां भी अमृत की पाइपलाइन डाली जा चुकी हैं उनको चालू कर दिया जाए। बैठक में जल संस्थान के अधिशासी अभियंता नरेशपाल सिंह, जलकल अभियंता विपिन कुमार चौहान, अमृत योजना के सहायक अभियंता राकेश कुमार त्रिपाठी, यूपीसीएल के अधिशासी अभियंता पवन सिंह आदि उपस्थित थे।
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रविदास बस्ती में लाइन डालने की जगह ही नहीं
रविदास बस्ती कनखल में पानी की पाइप लाइन डालने के लिए जगह ही नहीं है। जलकल अभियंता विपिन कुमार चौहान ने बताया कि ढाई फीट चौड़ी गली में सीवर, बिजली, गैैस की पाइप लाइन के साथ एक मोबाइल कंपनी की लाइन भी जा रही है। ये लाइनें सब आपस में सटी हुई हैं। पानी की लाइन डालने के लिए जगह ही नहीं है।