हरकी पैड़ी पर स्नान करते श्रद्धालु ।
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धर्मनगरी में सर्व पितृ अमावस्या पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। श्रद्धालुओं ने पितरों का तर्पण और पिंडदान कर गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। हरकी पैड़ी समेत आसपास के घाटों पर सुबह से देर शाम तक बड़ी भीड़ रही। पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर जरूरतमंदों को दान देकर पुण्य लाभ कमाया। अमावस्या पर हरकी पैड़ी पर संध्याकालीन आरती में भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। पुलिस और श्री गंगा सभा के कार्यकर्ताओं को व्यवस्था बनाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
कोरोनाकाल के चलते पिछले वर्ष सर्व पितृ अमावस्या पर कोरोना नियमों के साथ श्रद्धालुओं ने कर्मकांड किया था। इस बार कोरोना संक्रमण में राहत मिलने से बिना किसी पाबंदी के श्रद्धालु बुधवार को हरिद्वार पहुंचे। उत्तराखंड के अलावा यूपी और दिल्ली एनसीआर से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। ब्रह्म मुहूर्त में ही हरकी पैड़ी पर श्रद्धालुओं ने स्नान कर पितरों के निमित्त तर्पण कराया। पितृ मोक्ष अमावस्या पर तर्पण के साथ पितरों की विदाई की गई।
हरकी पैड़ी के अलावा अन्य घाटों पर भी श्रद्धालुओं ने स्नान कर पितरों का तर्पण किया। कुशाघाट पर तर्पण कराने के लिए भारी भीड़ रही। ज्योतिषाचार्य विकास जोशी ने बताया कि श्राद्ध पक्ष का समापन सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या से होता है। इस दिन उन मृत लोगों के लिए पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण कर्म किए जाते हैं, जिनकी मृत्यु तिथि मालूम नहीं होती है। पितृ मोक्ष अमावस्या पर सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों के पिंडदान किया गया।
नारायणी शिला पर पूजन के लिए उमड़ी भीड़
हरिद्वार। सर्व पितृ अमावस्या पर नारायणी शिला मंदिर पर सुबह से ही स्थानीय एवं दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर के कपाट सुबह साढ़े नौ बजे बाद खोले गए। इसके बाद भी श्रद्धालुओं ने सिर्फ दर्शन किए। तर्पण आयोजन नहीं हुआ। देवपुरा चौक स्थित श्री नारायणी शिला मंदिर पर पितरों का तर्पण पितृ पक्ष में 15 दिनों तक चला। मुख्य पंडित मनोज त्रिपाठी के मुताबिक बुधवार को सर्व पितृ अमावस्या होने के कारण मंदिर नित्य पूजा के लिए सुबह साढ़े चार बजे खुला। मगर मुख्य द्वार को बंद रखा गया। साढ़े नौ बजे जैसे ही श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिरों में दर्शनों के लिए पहुंची तो मुख्य द्वार को खोल दिया गया। इसके बाद द्वार को बंद कर फिर से 11 बजे खोला गया।