बड़मावस के रूप में मनाई जाने वाली ज्येष्ठ अमावस्या के दिन देशभर से आए लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा में डुबकी लगाई। महिलाओं ने वट वृक्षों के पास जाकर धागे लपेटे और पूजा अर्चना की। सावित्री सत्यवान की कथा सुनकर व्रत खोले और पितरों के निमित्त बायने निकाले। कुशावर्त और नारायणी शिला जाकर हजारों तीर्थयात्रियों ने श्राद्ध तर्पण संपन्न कराए।
बड़मवास स्नान के लिए बड़ी संख्या में बाहरी प्रदेशों के श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे थे। बृहस्पतिवार को हरकी पैड़ी पर गंगा स्नान सवेरे पांच बजे से शुरू हो गया था और दिन भर चलता रहा। गंगा के अन्य घाटों पर भी श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई।
बड़मावस वही दिन है जब सावित्री ने वरदान मांगकर पति सत्यवान का जीवन यमराज से बचा लिया था। हजारों महिलाओं ने सुहाग रक्षा के लिए घर घर व्रत रखे। वट वृक्षों पर जाकर पूजा अर्चना की गई। गौरतलब है कि अपने पति की मृत देह लेकर सावित्री वट वृक्ष के नीचे ही आसीन हुई थी। तब से देश भर की महिलाएं ज्येष्ठ अमावस्या के दिन वट वृक्षों की पूजा करती हैं। जो महिलाएं वृक्षों तक नहीं जा पाती, वे वट वृक्ष की डालियां घरों में लाकर पूजा अर्चना करती हैं। देश के विभिन्न भागों से आई तीर्थयात्री महिलाओं ने भी बड़ पूजे। स्नान और पूजा के बाद महिलाओं ने यथा स्थान जाकर दान पुण्य किया।
हर की पैड़ी पर स्नानार्थियों ने सूर्य देव को अर्घ्य प्रदान किया और गंगा में खड़े होकर अनेक धर्मग्रंथों का पाठ किया। बड़मावस के स्नान से पवित्र ज्येष्ठ मास का कृष्ण पक्ष संपन्न हो गया है। ज्येष्ठ की अमावस्या पितरों के निमित्त भी मानी गई है। देशभर से आए हजारों श्रद्धालुओं ने नारायणी प्रेत शिला पर पितृ मुक्ति श्राद्ध, कालसर्प योग निवारण, पितृ कर्मकांड और नारायणी कर्म संपन्न कराए।