विचारक गोविंदाचार्य ने कहा कि मानव केंद्रित विकास से प्रकृति केंद्रित विकास की ओर ले जाने वाला विकास ही सही मायनों में विकास है। समाज की कमजोर कड़ी का जितना विकास होगा वही वास्तविक विकास होगा। उन्होंने कहा कि गंगा ज्ञान, यमुना प्रेम, और नर्मदा वैराग्य की नदी है।
शनिवार को विज्ञान-विकास और मीडिया पर हरिद्वार के निष्काम सेवा ट्रस्ट में शुरू हुई दो दिवसीय मीडिया चौपाल को संबोधित करते हुए गोविंदाचार्य ने कहा कि गांव, किसान, नदी, पहाड़, पशु जब तक यह विकास की केंद्रीय धुरी में नहीं होंगे तब तक होने वाले सभी विकास विनाश को आमंत्रित करेंगे। सबके साथ मिलकर जीना ही जीने का कौशल है। सह-अस्तित्व के सिद्धांत को ध्यान में रखकर प्रकृति केंद्रित विकास ही आज की मूलभूत आवश्यकता है। वर्तमान विकास की अवधारणा इससे थोड़ा दूर है।
सांसद रमेश पोखरियाल ने कहा कि जिस विकास के पीछे हम दौड़ रहे हैं उस विकास में समन्वयता की जरूरत है। समाजसेवी अनूप नौडियाल ने कहा कि युवाओं में सीखने और जानने की जिज्ञासा होती है। इसलिए मीडिया चौपाल उन्हें प्रेरणाप्रद मंच प्रदान करता है। निस्केयर के प्रमुख डा. मनोज पटेरिया ने बताया कि हम ऐसा मंथन करें कि समाज में विकास संचार के माध्यम से हमारे चारों ओर जागरूकता फैले। अध्यक्षता कर रहे दिव्य प्रेम सेवा मिशन के आशीष गौतम ने भी मीडिया के महत्व पर प्रकाश डाला।
चौपाल में देव संस्कृति विवि के विद्यार्थियों ने गायत्री मंत्र के उच्चारण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। एक समाचार पत्र का भी विमोचन किया। दो दिन चलने वाली मीडिया चौपाल में देशभर के कई विद्वान विकास एवं मीडिया से जुडे़ विभिन्न विषयों पर विचार रखेंगे। चौपाल के मुख्य आयोजक स्पंदन के साथ देव संस्कृति विवि, दिव्य प्रेम सेवा मिशन, इंडिया वाटर पोर्टल, निस्केयर, अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विवि कर रहा है। चौपाल में अनिल सौमित्र, केसर सिंह, संजय चतुर्वेदी, हर्षवर्धन त्रिपाठी, डा सुखनंदन सिंह, आशिष अंशु, कुसुमलता केडिया, अनिल सती आदि मौजूद रहे।