हरिद्वार। देहरादून पुलिस जिस नाबालिग को मूक बधिर मान चुकी थी, यहां बाल सुधार गृह में बोलने लगा। किशोर के बांग्लादेशी होने के संदेह में दिन भर स्थानीय खुफिया एजेंसियां पूछताछ में जुटी रही। लेकिन किशोर की लिखी भाषा कोई नहीं समझ पाया। देर शाम पहुंची देहरादून पुलिस किशोर को अपने साथ ले गई।
देहरादून के प्रेमनगर थाना क्षेत्र के एक गांव में किशोर को संदिग्ध अवस्था में घूमता देखकर उसे ग्रामीणों ने पुलिस के हवाले किया था। देहरादून पुलिस ने जब बातचीत करनी चाही थी तब उसने बिलकुल भी जुबान नहीं खोली थी बल्कि इशारे समझने का नाटक रचा था। चाइल्ड हेल्प लाइन के माध्यम से देहरादून पुलिस ने उसे बाल सुधार गृह, रोशनाबाद भेजा था। 17 नवंबर को यहां लाया गया किशोर चुपचाप ही रहा। एक दिन जब उसने खाना नहीं खाया, तब सिडकुल थाने के एक कांस्टेबल ने उसकी लिखी भाषा समझनी चाही लेकिन वो भी समझ नहीं पाया। सोमवार को नहाने के लिए इनकार करने पर बाल सुधार गृह के एक कर्मचारी ने किशोर को डांट दिया। तब उसकी जुबान से बोल फूटे। लेकिन कर्मचारी को उसकी भाषा समझ नहीं आई। फिर सुधार गृह प्रशासन ने किशोर के मूक बधिर न होने की जानकारी पुलिस को दी। अजीब भाषा बोल रहे किशोर के मिलने की सूचना पर स्थानीय खुफिया एजेंसियों ने बाल सुधार गृह में डेरा डाल लिया। बाकायदा एक भाषा विशेषज्ञ को ले जाया गया। सूत्रों की माने तो इतनी जानकारी सामने आई है कि वह बांग्लादेशी हो सकता है। उसकी लिखी भाषा वह भी समझ नहीं पाया। इधर, यह जानकारी मिलने पर देर शाम पहुंची देहरादून पुलिस उसे अपने साथ ले गई। दून के एसएसपी सदानंद दाते ने बताया कि किशोर के बांग्लादेशी होने का संदेह है। भाषा विशेषज्ञों को बुलाकर इसकी हकीकत जानने का प्रयास करेंगे।