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306 रिक्रूट बने पुलिस का हिस्सा

Tue, 24 Nov 2015 12:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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हरिद्वार। सोमवार को 306 रिक्रूट उत्तराखंड पुलिस का हिस्सा बन गए। 40वीं वाहिनी पीएसी कैंपस में दीक्षांत परेड समारोह के दौरान रिक्रूटों ने राष्ट्र सेवा की शपथ ली। सर्वोत्तम कैडेट का खिताब भावना मुयाल ने अपने नाम किया। आईजी गढ़वाल रेंज संजय गुंज्याल ने दीक्षांत परेड की सलामी ली।
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सोमवार को दीक्षांत परेड को संबोधित करते हुए आईजी संजय गुंज्याल ने कहा कि हर पुलिसकर्मी को अनुशासन के दायरे में रहकर जनसेवा भाव से ही कार्य करना चाहिए। सेना, पैरामिलिट्री फोर्स से हटकर हर पुलिसकर्मी को मौजूदा परिस्थिति के लिहाज से निर्णय लेना पड़ता है। आईजी ने कहा कि मौजूदा समय में पुलिसकर्मी के सामने कई चुनौतियां हैं इसलिए बेहद सूझबूझ से कार्य करना होगा।
सेनानायक अरुण मोहन जोशी ने कहा कि पुलिसकर्मी से आमजन की बेहद अपेक्षाएं होती हैैं। रिक्रूटों को आतंकवाद, माओवाद, नक्सलवाद, व्यक्तित्व विकास, विधि विज्ञान, मानवाधिकार, अपराध की रोकथाम, तनाव प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण, डॉग स्कवॉयड, इलैक्ट्रीशियन, धुड़सवारी एवं तैराकी का प्रशिक्षण दिया। इस दौरान एटीसी की प्रधानाचार्य नीरु गर्ग, एसएसपी सेंथिल अबूदई कृष्णराज एस, एसपी सिटी नवनीत सिंह भुल्लर, उपसेनानायक सरिता डोबाल, एएसपी श्वेता चौबे, एएसपी सुरजीत सिंह पंवार, एएसपी अमित श्रीवास्तव आदि अधिकारी मौजूद रहे।
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इन्होंने मारी बाजी
आंतरिक विषय में सर्वोत्तम कैडेट भावना मुयाल, निभ्रांति महर, प्रवीण सिंह रहे और बाह्य विषय में सागर कुमार, गोविंद, दीपक, नरेंद्र दत्त जुलान, अमित प्रसाद ने बाजी मारी।
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इन्हें भी मिला सम्मान
हरिद्वार। रिक्रूटों को प्रशिक्षण देने वाले एसआई नागेंद्र प्रसाद घिल्डियाल को सर्वोत्तम अध्यापक का खिताब मिला। उनके अलावा शारीरिक प्रशिक्षक के तौर पर पीटीआई अजित सिंह ओर प्रशिक्षक हेड कांस्टेबल विक्रम सिंह भंडारी को चुना गया।
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जनसेवा और अनुशासन ही मकसद
- दीक्षांत परेड समारोह के बाद बोले रिक्रूट
अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। उत्तराखंड पुलिस में शामिल हुए हर रिक्रूट ने एक स्वर में कहा कि वह जनसेवा की भावना से पुलिस का हिस्सा बने हैं। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने ये ही अपने वरिष्ठों से जाना और सीखा है। उनका मकसद हर पीड़ित को न्याय दिलाना ही है ओर पुलिस की छवि को स्वच्छ रखना है।
सर्वोत्तम कैडेट चुनी गई भावना मुयाल की आंखें छलक आई। वर्ष 2013 में आई आपदा में कर्तव्य का निर्वहन करते हुए जान गंवा देने वाली महिला कांस्टेबल शैलबाला की छोटी बहन भावना मुयाल बोली कि आमजन की मदद करना ही मूल मकसद है, यह ही उसकी अपनी बहन को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। पौड़ी गढ़वाल के गांव सुमाड़ी की रहने वाली भावना बोली कि दीदी के आदर्श पर ही चलकर वह सर्वोत्तम कैडेट चुनी गई। चमोली के गांव पोखरी के दीपक कुमार का कहना है कि पुलिसकर्मी समाज का आंख कान होते है। वह हर बुराई को खत्म करने की इच्छाशक्ति रखता है। पुलिस में भर्ती होने का ख्वाब इसी मकसद के साथ पूरा हुआ है। रिक्रूट निभ्रांति मेहर बोली कि अनुशासन में रहकर अपने कर्तव्य को अंजाम देना है। पौड़ी के गांव सकलौनी के रहने वाले प्रशांत भारद्वाज बोले कि पुलिस में भर्ती होकर असली चुनौतियों से रूबरू हुआ हूं। भर्ती होने का असली मकसद तभी पूरा होगा जब वह किसी के संकट में उसके कार्य आ पाएं। यमकेश्वर के गांव देवराडी के रहने वाले आशुतोष का भी पुलिस में भर्ती होने का सपना था, उसका उद्देश्य भी जनसेवा ही है।
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