अवैध खनन के खिलाफ अन्न-जल त्याग चुके स्वामी शिवानंद सरस्वती को मनाने रविवार रात अपर जिलाधिकारी प्रशासन (एडीएम) जीवन सिंह नगन्याल मातृसदन पहुंचे। लेकिन डेढ़ घंटे तक वार्ता के बाद ठोस आश्वासन न दे पाने पर स्वामी शिवानंद ने अपना तप जारी रखने का ऐलान किया।
अवैध खनन के खिलाफ मातृसदन में दो संतों का अनशन चल रहा है। ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद 16 मई से अनशन कर रहे हैं। जबकि मातृसदन के संस्थापक स्वामी शिवानंद सरस्वती ने 21 मई से अनशन शुरू किया हुआ है। स्वामी शिवानंद सरस्वती ने 22 मई से जल भी त्याग दिया है। उन्होंने खुद को एक कमरे में कैद किया हुआ है।
ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद और स्वामी शिवानंद के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए जिला अस्पताल से गई डाक्टरों की टीम को मातृसदन की ओर से बैरंग लौटा दिया। रविवार रात करीब पौने नौ बजे अपर जिलाधिकारी प्रशासन जीवन सिंह नगन्याल मातृसदन पहुंचे। उन्होंने मातृसदन के संतों से अनशन को लेकर वार्ता की।
संत ब्रह्मचारी दयानंद ने बताया कि उनकी मांग गंगा में खनन बंद करना है। जब तक खनन बंद नहीं होगा मातृसदन का आंदोलन समाप्त नहीं होगा। उन्होंने बताया कि अपर जिलाधिकारी खनन बंदी को लेकर प्रशासन का कोई पत्र या आदेश नहीं दे पाए। केवल जुबानी बातों से मातृसदन झांसे में आने वाला नहीं है।
पहले गंगा से पौकलैंड और खनन कर रहे वाहनों को बाहर निकाला जाए, इसके बाद शासन-प्रशासन से कोई वार्ता हो सकती है।