दिल्ली के आईएएस अफसर सुरेंद्र मोहन से लूटे गए जेवरात ज्वालापुर के मित्तल ज्वैलर्स से बरामद होने पर भी हरियाणा पुलिस की दरियादली देखने को मिली। ज्वैलर्स को हिरासत में लेने के बाद हरियाणा पुलिस केवल अपने जेवरात लेकर लौट गई। चार घंटे तक कोतवाली कैंपस में पकी खिचड़ी को लेकर दिनभर सर्राफा कारोबारियों में माहौल गर्म रहा। हालांकि स्थानीय पुलिस ने इसे हरियाणा पुलिस का मामला बताकर खुद को किनारे कर लिया।
बृहस्पतिवार सुबह कुरुक्षेत्र के थाना सदर से एसआई रामप्रकाश के नेतृत्व में पहुंची एक पुलिस टीम ने ज्वालापुर कोतवाली में आमद दर्ज कराई। हरियाणा पुलिस ने स्थानीय पुलिस को संग लेकर बाजार चौकी के सामने मित्तल ज्वैलर्स पर छापा मारकर मालिक मनोज मित्तल को हिरासत में लिया। उसी के ही कब्जे से कुछ जेवरात बरामद हुए। पुलिस ज्वैलर्स को अपने साथ कोतवाली ले आई।
हरियाणा पुलिस के एसआई के मुताबिक उनके हत्थे चढ़े जहरखुरान राजविंदर निवासी नगलमंजा फगवाड़ा पंजाब की कार में अठ मई को दिल्ली से चंडीगढ़ के लिए आईएएस अफसर सुरेंद्र मोहन सवार हुए थे। रास्ते में ही राजविंदर ने आईएएस अफसर को नशीली कोल्डड्रिंक्स पिलाई। अधिकारी के बेहोश होने पर कुरुक्षेत्र में उन्हें छोड़कर मोबाइल, सोने की चेन, अंगूठी एवं नगदी लेकर फरार हो गया था। बुधवार रात उसे ऋषिकेश से उन्होंने दबोचकर वारदात में प्रयुक्त कार बरामद कर ली।
पूछताछ में जहरखुरान ने कबूला था कि लूटे जेवरात ज्वालापुर के मित्तल ज्वैलर्स पर बेचे हैं। ज्वैलर्स को हिरासत में लेने की खबर फैलने पर कई सर्राफा कारोबारी सक्रिय हो गए और कोतवाली पहुंच गए। स्थानीय पुलिस की दिलचस्पी भी जेवरात खरीदने वाले सर्राफ के प्रति देखने को मिली।
दोपहर बाद हरियाणा पुलिस जेवरात लेकर रवाना हो गई। लेकिन घंटों तक हरियाणा-ज्वालापुर पुलिस एवं सर्राफा कारोबारियों की केमेस्ट्री को लेकर चर्चा रही। ज्वैलर्स के छूट जाने पर ही सर्राफा कारोबारियों की जान में जान आई। एसएसआई गिरिश चंद्र शर्मा ने बताया कि ज्वैलर्स की गिरफ्तारी का विवेक हरियाणा पुलिस का था। उनका पूरा सहयोग किया था।
चौकी के पास खप रहा माल
चोरी-लूट का मामला पुलिस चौकी के ठीक सामने खप रहा है। स्थानीय पुलिस को इसकी भनक नहीं है। सर्राफा कारोबारियों का एक गुट भी बृहस्पतिवार को थाने पहुंचा। उन्होंने बाकायदा इस तरह के कार्य करने वाले सर्राफा कारोबारियों के नाम भी उंगलियों पर गिनाए लेकिन स्थानीय पुलिस ने दिलचस्पी नहीं ली।
इनका कहना है
ज्वैलर्स की भी कानूनन जिम्मेदारी बनती है। जब तक ये स्पष्ट न हो जाए कि जेवरात कहां से आए है। उसके खरीद संबंधी रसीद है या नहीं, ऐसी तमाम जानकारियां ज्वैलर्स को करनी चाहिए। यदि ये सब वो नहीं कर रहा तब उसकी मंशा सीधे सीधे संदेह के घेरे में है। चोरी या लूट की सम्पति बरामद होना कानूनन अपराध है।
मृणाल शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता