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दंपति ने किया मासूम का अपहरण

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अमर उजाला ब्यूरो
बहादराबाद।
कस्बे की हरिजन बस्ती में किराए पर रहने वाला दंपति मकान मालिक के दो साल के मासूम बेटे को लेकर फरार हो गया। मासूम की बरामदगी के लिए कई पुलिस टीमें गठित कर दी गई हैं।
कस्बा बहादराबाद की हरिजन बस्ती में संदीप पुत्र स्व. मांगेराम के घर में रिंकू एवं उसकी पत्नी प्रीति उर्फ पिंकी आठ महीने से किराये पर रह रहे थे। प्रीति सिडकुल स्थित सीएंडएस कंपनी में कार्यरत थी और उसका पति रिंकू किसी ग्रामीण का ट्रैक्टर चलाता था। बुधवार सुबह आठ बजे दंपति मकान मालिक के दो साल के बेटे लेकर फरार हो गए। जब मासूम की ढूंढ शुरू हुई तो दंपति भी गायब मिला। परिजन को माजरा समझते देर नहीं लगी।
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आसपास मालूम करने पर पता चला कि दंपति मासूम को लेकर बस में बैठकर रुड़की की तरफ गए हैं। मासूम के अपहरण की सूचना मिलने पर पुलिस सक्रिय हो गई। मकान मालिक संदीप ने पुलिस को बताया की एक सप्ताह पहले दंपति को मकान खाली करने को कहा था। बुधवार को उन्हें मकान खाली करना था। पुलिस ने जब रिंकू के मोबाइल पर संपर्क साधना चाहा तो वह स्विच ऑफ मिला। एसओ मनोहर सिंह भंडारी ने बताया कि महिला प्रीति का आईडी प्रू्फ मिला है, जिसमें उसका पता गांव रणखंडी भायला देवबंद सहारनपुर दर्ज है। एक पुलिस टीम सहारनपुर भेजी गई है। आरोपी पति के मोबाइल फोन की भी लोकेशन ली जा रही है।

खुद की संतान की हो गई थी मौत
दो साल के मासूम के अपहरण की आरोपी महिला प्रीति ने साल भर पहले एक संतान को जन्म दिया था, तब बीमारी से उसकी मौत हो गई थी। तभी से उसका मकान मालिक के बेटे से खासा लगाव था। ड्यूटी से लौटने के बाद वह मकान मालिक के बेटे की लाड़ दुलार में जुटी रहती थी। इसलिए जब मकान मालिक के बेटे को लेकर घर से निकली तब किसी को संदेह भी नहीं हुआ।

कोर्ट ने बहाल किए प्रधान के अधिकार
बहादराबाद। जिला मुख्यालय से सटे औरंगाबाद गांव की प्रधान हिरदेश देवी को हाईकोर्ट से राहत मिली है। उच्च न्यायालय ने ग्राम प्रधान के अधिकार बहाल कर दिए हैं।
औरंगाबाद निवासी सुरेश पाल पुत्र सोमपाल सिंह ने जिलाधिकारी से शिकायत कर आरोप लगाया था कि प्रधान हिरदेश देवी पत्नी साधुराम का अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र फर्जी है। स्कूटनी के आधार पर जाति प्रमाणपत्र 27 अक्तूबर 2016 को निरस्त किया गया था। प्रमाणपत्र निरस्त होने के बाद पांच अप्रैल 2017 को ग्राम प्रधान हिरदेश देवी को निलंबित करते हुए उनके वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार उप प्रधान को दे गए थे।
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जिलाधिकारी ने 27 नवंबर 2017 को प्रधान को बर्खास्त कर दिया था। इसके खिलाफ हिरदेश देवी ने उच्च न्यायलय में याचिका दायर की थी। 16 फरवरी 2018 को स्कूटनी कमेटी के निर्णय में तहसीलदार हरिद्वार के आदेश को निरस्त करते हुए पुनर्विचार करने के निर्देश दिए। अब उच्च न्यायालय ने 22 मार्च को ग्राम प्रधान हिरदेश देवी के बर्खास्तगी के आदेश निरस्त कर दिया। जिलाधिकारी ने बताया कि हाईकोर्ट के निर्देश पर ग्राम प्रधान को बहाल कर दिया गया है।
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