त्योहारी सीजन में जाली सिक्कों से बाजार में हड़कंप है। इस समय बड़े पैमाने पर 10 रुपये के जाली सिक्के बाजार में उतारे गए हैं। दिल्ली में जाली सिक्के बनाने की फैक्ट्री पकड़े जाने की खबरों पर अब व्यापारियों ने सिक्के लेने बंद कर दिए हैं। असली- नकली सिक्कों की पहचान नहीं होने से भ्रम की स्थिति बनी हुई है। ताज्जुब की बात यह है कि खरीदारी के दौरान आम लोगों को हो रही परेशानी से बैंक अब तक अंजान है। जाली सिक्के मिलने पर दुकानदार और आम लोग इनका क्या करें, इस बारे में भी कोई गाइड लाइन बैंकों की ओर से जारी नहीं की गई है।
जाली करेंसी बनाने और चलाने वाले गिरोह ने इस त्योहारी सीजन में 10 रुपये के सिक्कों पर दांव खेला है। बाजार में बड़े पैमाने पर जाली सिक्के चलाए जा रहे हैं। स्थिति यह है कि हर 10 सिक्कों में कम से कम चार सिक्के जाली पाए जा रहे हैं। तीन दिन पहले दिल्ली में जाली सिक्कों की फैक्ट्री पकड़ में आने की खबरों से लोगों का ध्यान सिक्कों पर पड़ा और दुकानदारों ने ग्राहकों से सिक्के लेने बंद कर दिए। हालांकि जानकारी के अभाव में सिक्के लेने वाले दुकानदारों को चूना लगाने से ग्राहक भी पीछे नहीं रहे। दुकानदार असली नकली के फर्क से अंजान होने के बावजूद सिक्के लेने से इन्कार कर रहे हैं। जिन दुकानदारों के पास हजारों रुपये के सिक्के जमा हैं, वह परेशान हैं।
पीएनबी अहमदपुर शाखा के सहायक प्रबंधक पी महेंद्रा का कहना है कि बैंक सिक्कों का लेनदेन नहीं करता है। ऐसी जानकारी तो जरूर मिल रही है, पर इस बारे में कोई दिशा निर्देश फिलहाल नहीं मिले हैं। वहीं लीड बैंक प्रबंधक केएस पॉल का कहना है कि जाली सिक्के बाजार में चलने की सूचनाएं मिल रही हैं, लेकिन अब तक इस बारे में कोई गाइड लाइन नहीं मिली है। जल्द ही इस बारे में आला अधिकारियों से बातचीत जनता के लिए कोई रास्ता निकाला जाएगा।
10 पैसे का सिक्का 10 रुपये में
जाली सिक्का बनाने में करीब एक दशक पहले बंद हो चुके 10 पैसे के सिक्के का इस्तेमाल किया जा रहा है। 10 पैसे के इस सिक्के के चारों तरफ पीली धातु का छल्ला फंसाकर इसे 10 रुपये के सिक्के के तौर पर चलाया जा रहा है। हालांकि थोड़ा सा ध्यान देने पर असली और नकली सिक्के की पहचान आसानी से की जा सकती है। असली सिक्के में रुपये का नया निशान होने के साथ ही 10 का आधा- आधा अंक गिलेट और पीले घेरे पर मुद्रित है। जबकि जाली सिक्के में 10 पैसे के सिक्के का इस्तेमाल होने से उसमें अंक सिर्फ गिलेट के बीच वाले हिस्से में है। वहीं असली सिक्के में 10 पंखुड़ियां बनी हैं। जबकि जाली सिक्के में 15 पंखुड़ियां हैं। असली सिक्के में अशोक स्तंभ बड़े आकार है, वहीं जाली सिक्के में यह 10 पैसे के सिक्के पर मुद्रित छोटे आकार का अशोक स्तंभ है।