देहरादून। सीएम हरीश रावत पूरे लाव लश्कर के साथ जिस कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे, प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने उसे दागियों का सम्मेलन बताकर वहां जाने से ही पल्ला झाड़ लिया। दिलचस्प पहलू यह है कि यह अजीबोगरीब राजनीतिक स्थिति तब देखने को मिली है जबकि प्रदेश अध्यक्ष समेत प्रदेश कार्यकारिणी के सभी आला पदाधिकारी कार्य समिति की बैठक के चलते हरिद्वार में ही थे।
सीएम हरीश रावत और कांग्र्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के बीच तमाम सियासी मुद्दों को लेकर जारी तल्खी एक बार फिर उजागर हुई है। बहादराबाद मेें आयोजित जिस कार्यक्रम में सीएम तमाम लाव लश्कर के साथ पहुंचे , उसमें प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय और तमाम आला पार्टी पदाधिकारियों की बात तो छोड़ें, जिलाध्यक्ष तक नहीं पहुंचा। इतना ही नहीं मीडिया कर्मियों से रूबरू प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने पत्रकार वार्ता के दौरान कार्यक्रम में न जाने का कारण भी गिनाया। कहा कि उन्हें बहादराबाद में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन के आयोजकों के बारे मेें नकारात्मक जानकारी मिली थी। इसी कारण से कार्यक्रम में हिस्सा नही लिया। हालांकि बाद में उन्होंने यह सफाई दी कि सीएम साहब जाएं या मैं जाऊ एक ही बात है। उल्लेखनीय पहलू यह रहा कि प्रदेश अध्यक्ष की गैर मौजूदगी के चलते जिलाध्यक्ष तेलूराम समेत कई जिला स्तरीय पार्टी पदाधिकारी सीएम के कार्यक्रम से नदारद रहे। मीडिया कर्मियों ने जब जिलाध्यक्ष तेलूराम से उनकी अनुपस्थिति का कारण जानना चाहा तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उन्हें कार्यक्रम की जानकारी ही नहीं दी गई। कार्यक्रम को लेकर उनके साथ कोई विचार विमर्श ही नहीं किया गया। ऐसे में मैने जाना उचित नही समझा।
बहरहाल इस प्रकरण से यह बात साफ हो जाती है कि सरकार और संगठन के बीच सब कुछ गड़बड़ है। यदि बहादराबाद कार्यकर्ता सम्मेलन दागियों का सम्मेलन था तो समय रहते इसकी जानकारी संगठन की ओर से सीएम रावत को क्यों नही दी गई? इतना ही नहीं सम्मेलन में किशोर उपाध्याय समेत तमाम पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं के न पहुंचने पर सीएम रावत ने अपरोक्ष रूप से सवाल भी खड़े किए। तमाम कयासों को दरकिनार को सीएम रावत न सिर्फ अचानक कार्य समिति की बैैठक में पहुंचे, वरन पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं को एकजुटता का पाठ भी पढ़ाया। सीएम रावत ने विपक्षी भाजपा का नाम लिए बगैर साफ तौर पर कहा कि यदि हम लोग एकजुट नही रहे तो विधानसभा चुनाव में विपक्षी इसका पृूरा फायदा उठाएंगे। बहरहाल सीएम की नसीहत का पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं पर कितना असर पड़ता है यह देखने वाली बात होगी।