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सीएम के बयान पर बिफरा मातृसदन

Sat, 17 Dec 2016 10:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
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विकास के नाम पर नदियों से खनन सामग्री निकालने को लेकर मुख्यमंत्री के बयान पर मातृसदन ने कड़ी आपत्ति जताई। परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद ने झूठे तथ्यों के आधार पर मातृसदन को बदनाम करने का आरोप लगाते हुए कानूनी नोटिस भेजा है। साथ ही खनन सामग्री निकालने को लेकर विधिवत प्रक्रिया के दावे का भी दस्तावेजों सहित खुलासा किया।

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शुक्रवार को एक कार्यक्रम में शिरकत के दौरान मातृसदन का नाम लिए बगैर कहा था कि विकास के लिए नदियों से खनन सामग्री निकालने पर कुछ लोग हल्ला मचाते हैं। जबकि विधिवत प्रक्रिया अपनाने के बाद ही खनन सामग्री निकाली जाती है। शनिवार को पत्रकार वार्ता में स्वामी शिवानंद ने कहा कि मातृसदन के आंदोलनों के फलस्वरूप केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और हाईकोर्ट से खनन पर रोक लगने से मुख्यमंत्री बौखला गए हैं और गलत तथ्यों के आधार पर मातृसदन को बदनाम कर रहे हैं। स्वामी शिवानंद ने कहा कि गंगा सफाई के नाम पर खनन कराने को लेकर छह मई 2005 को जिलाधिकारी ने सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता को पत्र भेजा। इसी दिन हरिद्वार, लक्सर के एसडीएम, डीएफओ के प्रतिनिधि और खनन अधिकारी सहित पूरी कमेटी बन गई और कमेटी ने श्यामपुर, बिशनपुर, भोगपुर, रायसी, बुग्गावाला सहित सभी नदियों का सर्वे कर अपनी रिपोर्ट भी सौंप दी। इतना ही नहीं डीएम ने अपने पत्र में छह मई को हरिद्वार ग्रामीण विधायक स्वामी यतीश्वरानंद के पत्र के अलावा सात मई को लक्सर विधायक संजय गुप्ता के पत्र का संज्ञान भी एक दिन पहले ही ले लिया।
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स्वामी शिवानंद ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए यह भी बताया कि गंगा सफाई के नाम पर 100 करोड़ से ज्यादा की खनन सामग्री निकाली गई और उसके टेंडर या राजस्व का कोई रिकॉर्ड प्रशासन, सिंचाई विभाग या वन विभाग के पास नहीं है। ऐसे में सीएम बताएं कि 100 करोड़ से ज्यादा की रकम किसकी जेब में गई। स्वामी शिवानंद ने कहा कि मातृसदन के अधिवक्ता के माध्यम से कानूनी नोटिस मुख्यमंत्री को भेजा जा रहा है। सीएम को कई सवालों के जवाब देने होंगे।

किशोर उपाध्याय का पत्र भी दरकिनार
गंगा में अवैध खनन से तटवर्ती गांवों को बाढ़ का खतरा जताते हुए ग्रामीणों ने अलग- अलग पत्र उसी दौरान प्रशासन को भेजे। इनमें एक पत्र कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष की ओर से प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को भेजा गया और किशोर उपाध्याय ने ग्रामीणों के हस्ताक्षरयुक्त बयान सहित जिलाधिकारी को चिट्ठी भेजी। किशोर उपाध्याय और ग्रामीणों के पत्र का संज्ञान ही नहीं लिया गया। स्वामी शिवानंद ने कहा कि वैज्ञानिक दल की रिपोर्ट को भी प्रशासन और शासन ने पूरी तरह अनदेखा किया।
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सेटेलाइट चित्र खोल रहे दावों की पोल
स्वामी शिवानंद ने पत्रकार वार्ता के दौरान गंगा के सेटलाइट से लिए गए चित्र भी प्रस्तुत किए। इनमें वर्ष 2003 और वर्ष 2010 में एक ही जगह के दो- दो चित्र दिखाए गए। स्वामी शिवानंद ने कहा कि गंगा में टापू बनने का हवाला देकर खनन कराने वालों को इन चित्रों को देखें। चित्र में साफ दिखाई दे रहा है कि जहां खनन हुआ है वहां हरियाली ही खत्म नहीं हुई है बल्कि गंगा से बाढ़ का खतरा भी कई गुना ज्यादा बढ़ गया है। सेटलाइट चित्र में गंगा के आस पास बड़े पैमाने पर क्रशर भी दिखाई पड़ रहे हैं।
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