हरिद्वार। धर्मनगरी में सकट चतुर्थी की पर्व श्रद्घापूर्वक मनाया गया। महिलाओं ने दिन भर व्रत रखकर बच्चों के दीर्घायु की कामना की। सायंकाल गुड़ तिल और मेवों से बने मीठे पदार्थ पकवान के साथ दान किए गए।
सकट भवानी के निमित्त यह पर्व माघ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। प्रात:काल घरों में सकट भवानी के चित्र स्थापित किए गए। पुत्र और पुत्रियों की दीर्घायु मांगते हुए मां सकट से प्रार्थना की गई कि संतान का जीवन सुख के साथ बीते। शक्कर और तिल मिलाकर परंपरागत रूप से तिलकुट तैयार किया गया। यह पर्व शरद ऋतु के धीरे-धीरे जाने का प्रतीक पर्व भी है। घरों में अग्नि प्रज्ज्वलित कर तिल यज्ञ किया गया।
सायंकाल मुहल्लों और कालोनियों में किसी एक स्थान पर एकत्रित होकर महिलाओं ने मां सकट की कथा सुनी। देवी के मंदिरों में जाकर भी परिवार मंगल की कामना की गई।