हरिद्वार। श्रवणनाथ नगर स्थित नरसिंह धाम के जगद्गुरू स्वामी अयोध्याचार्य के गुरु ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी नारायण दास महाराज की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। स्वामी अयोध्याचार्य ने कहा कि ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी नारायण दास महाराज त्याग, तपस्या और सेवा की साक्षात प्रतिमूर्ति थे। धर्म शास्त्रों का उनका ज्ञान विलक्षण था। महंत रघुवीर दास व महंत ईश्वर दास ने कहा, स्वामी नारायण दास ने समाज को अध्यात्म की शिक्षा देकर कल्याण की राह दिखाई। इस दौरान महंत प्रेमदास, रविदेव शास्त्री, महंत बिहारी शरण, महंत मोहन सिंह, महंत गंगादास उदासीन, महंत जसविंदर सिंह, महंत सूरज दास, महंत प्रह्लाद दास आदि मौजूद रहे।
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जीवात्मा और परमात्मा का मिलन ही महारास है: शास्त्री
हरिद्वार। रेलवे रोड़ स्थित गरीबदासीय आश्रम में चल रही श्रीमद्भावगत कथा के छठे दिन कथा व्यास स्वामी रविदेव शास्त्री ने महारास लीला का वर्णन करते हुए कहा कि महारास में जीवात्मा और परमात्मा का मिलन हुआ। जीव और परमात्मा तत्व ब्रह्म के मिलन को ही महारास कहते हैं। महारास में पांच अध्याय हैं। उनमें गाये जाने वाले पंच गीत भागवत के पंच प्राण हैं जो भी ठाकुरजी के इन गीतों को भाव से गाता है। मुख्य यजमान दर्शन कुमार वर्मा, माता सुदेश, रमेश लुथरा, रितु बहल, सार्थक, कमलेश, विक्रम लूथरा, नितिन लूथरा, कनिका, सुगम, डा.संजय वर्मा ने संतों का स्वागत किया। इस दौरान स्वामी परमात्मदेव, स्वामी निर्मल दास, स्वामी दिनेश दास, स्वामी सुतिक्ष्ण मुनि, डा.संजय वर्मा आदि मौजूद रहे।