जिला अस्पताल के ब्लड बैंक स्थित ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट तैयार है। अब केवल लाइसेंस का इंतजार है। इससे पहले सभी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। उम्मीद जताई जा रही है कि जनवरी में ही सेपरेशन यूनिट चालू कर दी जाएगी। इससे जरूरतमंदों को हरिद्वार में ही ब्लड के जरूरी तत्व मिल सकेंगे।
हरिद्वार जनपद में डेंगू, मलेरिया, आग से जलने आदि के पीड़ितों के मामले भारी संख्या में आते हैं। इन पीड़ितों को ब्लड चढ़ाने की जरूरत पड़ती है, लेकिन कई पीड़ितों को सहयोगी तत्व चढ़ाने की जरूरत होती है। जनपद में किसी ब्लडबैंक में ब्लड से तत्व निकालने की सुविधा नहीं होने से दिक्कतें आती थी। अब हरिद्वार ब्लड बैंक में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट तैयार हो चुकी है। सेपरेशन यूनिट से ब्लड से चार अलग-अलग तत्व निकालने का काम किया जा सकेगा। यूनिट के लिए पर्याप्त स्टाफ, प्रशिक्षण आदि प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। लाइसेंस के लिए दिल्ली से एनएचएम की टीम निरीक्षण कर चुकी है। अब केवल लाइसेंस जारी होने का इंतजार है। वरिष्ठ पैथोलॉजिस्ट डा. एसएन खान ने बताया कि ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट संचालन के लिए सभी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। लाइसेंस इस सप्ताह के अंदर जारी हो जाएगा।
क्या है कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट
ब्लड में 4 कंपोनेंट होते हैं। इनमें रेड ब्लड सेल (आरबीसी), प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट शामिल हैं। सेपरेशन यूनिट में ब्लड को घुमाया (मथा) जाता है। इससे ब्लड परत दर परत (लेयर बाई लेयर) हो जाता है और आरबीसी, प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट अलग-अलग हो जाते हैं। जरूरत के मुताबिक इनको निकाल लिया जाता है। निकले गए रक्त के प्रत्येक तत्व की अलग-अलग जीवन अवधि होती है। एक यूनिट 3 से 4 लोगों की जरूरत पूरी कर सकती है।
ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट लगाने की प्रक्रिया जटिल है। सभी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। एनएचएम सेंट्रल से लाइसेंस शीघ्र जारी होने की उम्मीद है। यूनिट चलाने के लिए स्टाफ पूरी तरह से तैयार है। यूनिट चालू होते ही मरीजों को जरूरी तत्व मिलने शुरू हो जाएंगे। इससे मरीजों को रेफर नहीं करना पड़ेगा।
डा. बीएस जंगपांगी, सीएमओ, हरिद्वार।