शिक्षक राजेश सिंह हत्याकांड में हरिद्वार पुलिस की जांच की सुई बिहार में चले संपत्ति विवाद के इर्द गिर्द ही आकर ठहर गई है। बेशकीमती तीन एकड़ भूमि को लेकर छोटे भाई राधाकृष्ण से हुआ विवाद शिक्षक के पिता गिरिजानंद सिंह जीते थे और भूमि बेच भी दी थी। कुछ माह पूर्व चचेरा भाई कुछ साथियों के साथ मिलकर डराने धमकाने यहां भी पहुंचा था। पुलिस अब बिहार कनेक्शन को ही खंगालने में जुटी है।
शनिवार शाम शिवालिक नगर निवासी रिटायर्ड भेलकर्मी जीएन सिंह के बेटे शिक्षक राजेश सिंह की गांव रावली महदूद में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वे अपनी गोशाला से दूध लेकर लौट रहे थे। जब शिक्षक को गोली मारी गई तब पिता कुछ दूरी पर ही पैदल चल रहे थे और शिक्षक ने मोटरसाइकिल स्टार्ट ही की थी। छाती में गोली लगने से शिक्षक की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी। पुलिस के अनुसार मूल रुप से बिहार के गांव बखरा, जिला पटना निवासी रिटायर्ड भेलकर्मी जीएन सिंह की तीन एकड़ भूमि पर छोटा भाई ही खेती करता था, लेकिन छोटे भाई ने फिर भूमि पर अपना ही अधिकार जताना शुरू कर दिया था। पटना के जिलाधिकारी की कोर्ट में चले केस में फैसला जीएन सिंह के पक्ष में आया था। इसके बाद उन्होंने भूमि को गांव के ही एक परिचित को बेच दिया था। एडवांस पचास लाख की रकम भी मिली थी। तब से सगे भाइयों के बीच संबंध ठीकठाक नहीं थे। कुछ माह पूर्व राजेश का चचेरा भाई कुछ परिचितों के साथ मिलकर यहां डराने धमकाने भी पहुंचा था। हरिद्वार पुलिस भी इसी प्वाइंट पर फोकस कर जांच में जुटी है। नगर पुलिस अधीक्षक परमेंद्र डोबाल ने बताया कि संपत्ति विवाद पर जांच आगे बढ़ा दी गई है।
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राजेश को 23 को जाना था बिहार
हरिद्वार। राजेश को 23 फरवरी को बिहार में भूमि की रजिस्ट्री के लिए जाना था। बाकायदा टिकट भी बुक करा दी गई थी। राजेश कुछ भूमि की रकम मिलने पर रजिस्ट्री कर चुका है, लेकिन बाकी बची भूमि की रकम मिलने पर ही रजिस्ट्री करने की बात तय हुई थी।
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करोड़ों की है संपत्ति
हरिद्वार। रिटायर्ड भेलकर्मी जीएन सिंह की संपत्ति ठीकठाक है। शिवालिक नगर में उनके मकान में भी कई किरायेदार रहते हैं। गांव रावली महदूद में कई मंजिल के दो मकान बने हैं और एक निर्माणाधीन है। आधा दर्जन के आसपास दुकानें और कई भूखंड भी है। एक भूखंड को गोशाला के तौर पर इस्तेमाल भी करते हैं। दो मकान में करीब 150 छोटे छोटे कमरे बनाए हुए है। सिडकुल की औद्योगिक इकाईयों में कार्यरत कर्मचारी ही किराये पर रहते है। पेशे से शिक्षक रहे राजेश ने अब ट्यूशन देना बंद कर दिया था।
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ऐसा कभी सोचा भी नहीं था
- पिता ने बयां की अपने इकलौते बेटे के हत्याकांड की दास्तां
अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। एक पिता के लिए इससे बड़ा दुख क्या होगा कि अपने बेटे की अर्थी को कंधा देना पड़ जाए। भेल से रिटायर गिरीजानंद ऐसे अभागे पिता में शामिल हैं।
जिला अस्पताल परिसर में गुमसुम गिरीजांनद की आंखों के आंसू सूख चुके हैं। पूछने पर पिता बोले कि, हम आगे चल रहे थे। दूध का केन हाथ में था। पीछे पीछे राजेश आ रहे थे। बिजली नहीं थी। तभी अचानक तेज आवाज हुई। पीछे मुड़कर देखा तो बेटा नीचे गिरा था। जब पास गए तो देखे कि मुंह से खून निकल रहा है। ये कहते कहते गिरीजानंद फिर चुप हो जाते हैं। वर्ष 2009 में भेल से रिटायर्ड हुए गिरिजानंद चेहरे से खामोश दिखते हैं पर अंदर ही अंदर बेटे की मौत का गम चेहरे पर दिखता है। पूछने पर संपत्ति विवाद की सिलसिलेवार जानकारी देते है। बकौल गिरिजानंद की उनकी दुश्मनी किसी से नहीं थी। हां, भाई से विवाद हुआ था। क्योंकि भाई की नीयत उनकी संपत्ति पर बिगड़ गई थी। भला संपत्ति कैसे छोड़ देते। बेटा भी यही चाहता था। हरिद्वार में रहकर केस लड़कर जीते। यही सोचकर जमीन बेच दी कि, विवाद से दूर ही रहे। क्या पता था कि, बेटे को जान गंवानी पडे़गी। वे सीधे सीधे तो नहीं बोलते पर अपने सगे भाई को क्लीन चिट भी नहीं दे रहे। बोलते है कि, उनकी कोई दुश्मनी नहीं थी। केवल बिहार में ही संपत्ति को लेकर झगड़ा चल रहा था।
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315 बोर का हुआ इस्तेमाल
हरिद्वार। पुलिसिया जांच में निकलकर आ रहा है कि हत्याकांड को अंजाम देने में देसी तमंचे का इस्तेमाल हुआ है। क्योंकि, कारतूस 315 बोर का है। अमूमन यह बोर आसानी से उपलब्ध हो जाता है। अधिकांश देसी हथियार 315 और 312 बोर के ही बनते है। गोली इतनी पास से मारी गई थी कि छाती को चीरते हुए गोली सीधे रीढ़ की हड्डी के पास आकर फंस गई थी।
मोबाइल डॉटा भी घटनास्थल से उठाया
हरिद्वार। शिक्षक हत्याकांड के खुलासे के लिए जुटी हरिद्वार पुलिस की निगाह शिक्षक के मोबाइल फोन पर भी है। घटनास्थल से भी पुलिस ने डॉटा उठाया है। क्या पता कोई लिंक हत्याकांड से जुड़ा सामने आ जाए। क्रिमीनल इंटेलीजेंस यूनिट को इस कार्य के लिए लगाया गया है।
बेटे को देखकर सभी हैरत में
हरिद्वार। बेटा तनिष्क भले ही आठ बरस का है लेकिन वह बेहद ही समझदार है। मेट्रो अस्पताल में बेटे के व्यवहार को देखकर हर कोई एक बारगी हैरत में पड़ गया। बार बार छोटा सा बालक मीडिया को बुलाने की बात करता रहा। उसका व्यवहार अपनी से काफी बड़े बच्चों जैसा ही था। शिक्षक का एक बेटे है और बेटे से बड़ी बेटी उन्नति है। पत्नी निशा सदमे में है। रह रह कर पति का नाम ही जुबां पर है। रिटायर्ड भेलकर्मी की पत्नी की कुछ वर्ष पूर्व मौत हो चुकी थी और दो बेटियां है जिनकी भी शादी हो चुकी है। ये दोनों राजेश से छोटी है।