धनतेरस का पर्व कन्या के चंद्रमा में पड़ रहा है। इंद्र योग और कन्या के चंद्रमा पड़ने से चांदी, तांबे की खरीद बेहद शुभ मानी गई है। दोपहर 12 बजे से रात्रि आठ बजे तक पीतल, तांबे और चांदी के पात्र खरीदने का मुहूर्त है।
ज्योतिषाचार्य डा. प्रतीक मिश्रपुरी ने बताया कि इस दिन सांयकाल 6:25 बजे से 8:20 बजे तक प्रदोषकाल पड़ रहा है। इस काल में आटे का चौमुखा दिया सरसों का तेल भरकर जलाया जाता है। इस दीपक को घर के द्वार पर रख दिय जाए तो घर में पूरे वर्ष अकाल मृत्यु नहीं होती। यह दीपक मृत्यु के देवता यम के लिए जलता है।
दीपक जलाने का एक मंत्र भी है। जलाने से पूर्व यदि- ‘ऊं मृत्युनां पाशदंडाश्या कालेन श्यामया सह त्रयोदश्यां दीपदाना सूर्यज: प्रीयतां मम्‘ का पाठ करें तो यमराज प्रसन्न होते हैं। इसी दिन औषधियों के जनक धनवंतरि का जन्मदिन भी मनाया जाता है।
डा. मिश्रपुरी के अनुसार किसी भी साध्य अथवा असाध्य रोग को समाप्त करने के लिए यदि धनतेरस के दिन औषधि प्रारंभ की जाए तो लाभ निश्चित है। इसी दिन पंचमुखी हनुमान की उपासना तंत्र शास्त्र में बताई गई है। यदि धन संचय का शुभारंभ करना है तो इस दिन बैंक में खाता खोलें। लंबे समय के लिए धन का निवेश भी इस दिन करना चाहिए। धनतेरस का दिन सर्वाग्रही योग उत्पन्न करता है।