आईआईटी संस्थान की मौजूदगी के चलते रुड़की में अन्य शहरों की अपेक्षा मैगी के शौकीनों की संख्या ज्यादा थी। जो अब एकदम से घट गई है। प्रतिबंध के बाद जहां एक ओर दुकानदाराें ने इससे किनारा कर लिया वहीं लोगाें ने भी अपनी सेहत के मद्देनजर खुद ही मैगी से मुंह मोड़ लिया है।
कई दुकानदारों की माने तो एक सप्ताह में उनके 20 पैकेट भी नहीं बिक पाए हैं। चंद रोज पहले शताब्दी द्वारा पर भाटिया फूड प्वाइंट और रोडवेज के सामने चाय की दुकानाें पर आईआईटी के छात्रों का जमावड़ा केवल मैगी के स्वाद को चखने के लिए लगता था।
जब से मैगी में हानिकारक तत्व होने का पता चला और इस पर प्रतिबंध लग गया है तो आईआईटी छात्राें ने ही नहीं बल्कि शहरवासियों ने भी अपना मन बदल लिया। इससे दुकानदाराें का खासा नुकसान भी उठाना पड़ा है। भाटिया फूड प्वाइंट के स्वामी की माने तो उनकी दुकान आईआईटी के गेट के पास होने के चलते यहां हर रोज 500 से 600 पैकेट मैगी की बिक्री होती थी।
अब न तो मैगी बिक रही है और न ही वह प्रतिबंध के चलते इसके पैकेट रख रहे हैं। दुकानदार पवन अग्रवाल ने बताया कि सच्चाई यह है कि अब लोग खुद भी इसे नहीं खा रहे हैं। पूरे शहर भर में रोजाना 10 से 12 हजार मैगी के पैकेटों की बिक्री होती थी। जो अब लगभग खत्म हो चुकी है।
आईआईटी कैंटीन में पहले ही रोक
आईआईटी की मैस और भवन कैंटीन में मैगी पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। संस्थान के डीन स्टूडेंट प्रो. डीके नौडियाल ने बताया कि उन्हाेंने 15 दिन पहले ही संस्थान में मैगी पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इसके लिए कैंटीन संचालकों सहित भवन के पदाधिकारियों को भी दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। इसकी जांच भी कराई गई है।
उबले हुए चने और दालें भी देंगे उतना ही स्वाद
डाक्टरों के मुताबिक ज्यादा दिनों से एक चीज का इस्तेमाल करने के बाद उसके स्वाद को छोड़ पाना मुश्किल होता है। अब बाजार में मैगी नहीं मिलेगी तो टेस्ट भी बदलना पड़ेगा। नए टेस्ट का अपनाने के साथ-साथ इस बात का भी ख्याल रखे कि वह आपके के लिए स्वास्थ्यवर्धक हो।
शहर के प्रसिद्ध फिजीशियन डा. विनय गुप्ता के अनुसार वह किसी भी मरीज और स्वस्थ व्यक्ति को फास्ट फूड की सलाह नहीं देते, क्योंकि इससे फैट कंटेंट बढ़ने के साथ ही तमाम तरह की बीमारियां पनपती है। उनके अनुसार लोगों को चाहिए कि वह किसी भी फास्ट फूड की जगह उबली हुई या अंकुरित दालाें, चनों को अपनाएं।
इन्हें भी स्वाद के अनुरूप बनाया जा सकता है। इसके अलावा सब्जी, सलाद, जूस का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करें।