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चिश्ती की मजार के नीचे शिवलिंग : शंकराचार्य

Fri, 05 Jun 2015 01:57 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/हरिद्वार
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जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का कहना है कि अजमेर में चिश्ती की दरगाह और ताजमहल के नीचे भी शिवलिंग है। मुस्लिम काल में देश के मंदिरों को निशाना बनाया गया। लेकिन मुस्लिमों की यह साजिश सफल नहीं हुई। जिसके बाद एक मुस्लिम ने साईं बाबा की प्रतिमाएं मंदिरों में रखवाने की साजिश रची।
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बृहस्पतिवार दोपहर कनखल के शंकराचार्य मठ में पत्रकारों से वार्ता में स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि देश में जब मुस्लिमों का शासन था तो उन्हें मस्जिद बनाने के लिए जमीन की कमी नहीं थी। लेकिन उन्होंने इसके लिए हिंदू मंदिरों को चुना। काशी, सोमनाथ, मथुरा और राम जन्मभूमि हर जगह मंदिरों को निशाना बनाया गया।

वहां पर मस्जिद घोषित करने की साजिश रची गई। इससे पहले लखनऊ से आए हरिशंकर जैन और रंजना ने शंकराचार्य से मुलाकात की। दोनों की ओर से अप्रैल में ताजमहल को लेकर आगरा की सिविल कोर्ट में याचिका दाखिल की है। जिसमें अगली तारीख 15 जुलाई लगी है।
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हरिशंकर जैन ने बताया कि ताजमहल मकबरा नहीं बल्कि हिंदू मंदिर है। उन्होंने कहा कि इसके कई दरवाजे शाहजहां के काल से भी पहले के हैैं। फिर ताजमहल शाहजहां की ओर से निर्मित कराया गया, यह कैसे हो सकता है। उन्होंने कहा कि आज भी ताजमहल के 22 कमरे बंद हैं। मकबरे में इतने कमरे होने का क्या मतलब है।

उन्होंने कहा कि ताजमहल में 623 चिन्ह ऐसे हैं जो सिद्ध करते हैं कि यह हिंदू स्थल है। उन्होंने शंकराचार्य से अनुुुरोध किया कि ताजमहल में बंद पड़े अग्रेश्वर महादेव की मुक्ति के लिए राम जन्मभूमि की तरह देश में जनजागरण चलाया जाना चाहिए।
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