उत्तराखंड आयुर्वेद एवं यूनानी सेवाएं के निदेशक प्रो. एके त्रिपाठी ने कहा कि पाचन तंत्र के रोगों की चिकित्सा में आयुर्वेद का विशिष्ट स्थान है। आयुर्वेद द्वारा पाचन तंत्र के रोगों का बिना दुष्प्रभाव के स्थायी उपचार किया जाता है। वर्तमान की अव्यवस्थित दिनचर्या और फास्ट फूड के अत्यधिक प्रचलन के कारण आहर नाल से संबंधित रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है।
प्रो. त्रिपाठी उत्तराखंड आयुर्वेद विवि के ऋषिकुल परिसर में आयुष मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पेट एवं पाचन तंत्र के रोग पर अंतरराष्ट्रीय सेमीनार को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुम्बई से पधरे पंचकर्म के विद्वान प्रो. यूएस निगम ने कहा कि आयुर्वेद की पंचकर्म विद्या के प्रयोग जैसे वमन कर्म, विरेचन कर्म एवं बस्ति कर्म के द्वारा आमाशय छोटी आंत व बड़ी आंत के अनेक कष्ट साध्य रोग जैसे- कोलाइटिस, पोप्टिक अलसर, संग्रहणी, आईबीएस, लिवर के रोग आदि का सफल उपचार किया जाता है।
संगोष्ठी के प्रथम वैज्ञानिक सत्र के अध्यक्ष बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. एसके तिवारी ने कहा कि भोजन का पाचन ठीक तरह से न होने पर अपक्व, कच्चा आहार रस बनता है, जिसे आयुर्वेद मे आम कहते हैं। संपूर्ण शरीर में इस आमरस के प्रवाहित होने से कई प्रकार के रोग जैसे ह्दय रोग, पेट के रोग, दमा, गठिया, सिरदर्द, बालों का झड़ना, त्वचा के रोग आदि उत्पन्न होते है। इन रोगों का स्थायी इलाज पाचन तंत्र को ठीक करना ही है।
द्वितीय सत्र की अध्यक्षता प्रो. पीएस श्रीवास्तव पूर्व विभागाध्यक्ष राजकीय आयुर्वेदिक कालेज लखनऊ ने की। मुख्य वक्ता के रूप में गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय के प्रो. अनूप ठाकुर ने पंचकर्म में विशेष रूप से बस्ति कर्म एवं विरेचन कर्म का एसिडिटी, ग्रहणी पर किए गए अनुसंधानिक प्रयोगों के विषय में विस्तार से बताया। तृतीय सत्र की अध्यक्षता आयुर्वेदिक कालेज उदयपुर के प्राचार्य प्रो. गौरीशंकर इंदौरिया ने की। प्रमुख वक्ता राजीव गांधी आयुर्वेद कालेज पपरोला के प्राचार्य प्रो. वाईके शर्मा ने पाचन तंत्र के रोगों में दूषित अन्न एवं दूषित जल को प्रमुख कारण बताते हुये स्वस्थ जीवन शैली अपनाने पर जोर दिया।
ऋषिकुल परिसर के निदेशक एवं संयोजक प्रो. एएन पांडे, आयोजन सचिव प्रो ओपी सिंह, डॉ. उत्तम शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया। प्रो. एएन पांडे ने बताया कि सेमीनार में करीब 250 शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। सेमीनार में इंदौर के आयुर्वेद कालेज के प्राचार्य प्रो एके सिंह, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. जेएस त्रिपाठी, प्रो. नीरज खन्ना, प्रो. वीडी अग्रवाल, श्रीलंका से आए प्रो. एचएस आर्या वंशा, डा. कमल सचदेवा, डा. अजय पांडेय, डा. दिनेश गोयल, प्रो. वीजे तिवारी, प्रो. राध बल्लभ सती, प्रो. वीजे तिवारी आदि मौजूद रहे।