रेलवे ट्रैक को डबल करने के लिए ऊंचे पुल को तोड़ने के चलते आवाजाही बंद होने के पहले ही दिन ज्वालापुर की यातायात व्यवस्था धड़ाम हो गई। दिनभर रेलवे फाटक पर जाम लगा रहा और लोगों का सर्दी के मौसम में भी पसीना निकल गया। इस दौरान पुलिस कहीं नजर नहीं आई लोगों ने शोर मचाया तो दोपहर बाद पुलिस जाम खुलवाने पहुंची। यातायात पुलिस दूर दूर तक नहीं दिखाई दी। दिन भर जाम का सिलसिला चलता रहा। अगर सिस्टम नहीं बनाया गया तो सितंबर तक चलने वाले इस काम केे कारण आने वाले समय में लोगों की दिक्कत बढ़ना तय है।
सोमवार की सुबह से ऊंचा पुल मार्ग अगले सितंबर माह तक के लिए बंद कर दिया। ऐसे में मुख्य मार्ग का सारा ट्रैफिक रेलवे मार्ग डायवर्ट कर दिया गया। ऐसे में भेल सेक्टर दो से रेलवे फाटक और आर्यनगर से रेलवे फाटक रोड पर दबाव बढ़ गया। पुलिस को इस बात की जानकारी भी थी लेकिन सोमवार सुबह पुलिस बिलकुल भी अलर्ट नहीं दिखाई दी। ट्रेनों के आवागमन पर फाटक लगते ही जाम लगता रहा। पब्लिक खुद ही जैसे तैसे निकलती रही। लोग आगे निकलने की होड़ में एक दूसरे से उलझते भी रहे लेकिन पुलिस कहीं नहीं दिखी। दोपहर बाद जब जाम की समस्या ने विकराल रूप ले लिया तब रेल चौकी पुलिस मौके पर पहुंची। प्रभारी प्रदीप मिश्रा खुद मौके पर पहुंचे और यातायात व्यवस्था की कमान संभाली लेकिन फिर भी जाम की स्थिति बनती बिगड़ती रही।
---------------------------------------------
आर्यनगर चौक से आगे नहीं जाने दिया
जाम के दौरान पुलिस की रणनीति पूरी तरह फेल नजर आई। आर्यनगर चौक से रेलवे फाटक की तरफ चौपहिया वाहन को जाने ही नहीं दिया जा रहा था। इसके बाद भी इक्का दुक्का भारी वाहन इस मार्ग पर दिखाई दिए।
---------------------------------
नहीं थी कोई प्लानिंग, गपशप करते रहे सिपाही
हरिद्वार। रेलवे फाटक पर पब्लिक जाम से जूझ रही थी और पुलिस ने इससे निपटने की कोई योजना ही नहीं बनाई। यातायात को लेकर बड़े दावे करने वाले आला अफसर भी गायब दिखाई दिए। लोग जाम से जूझ रहे थे और पीएसी के सिपाही वहां खड़े थे, जहां से रोड बंद की थी। श्यामनगर तिराहे और लाल मंदिर कालोनी मोड़ पर पुलिस ने बेरिकेटिंग कर दी थी और उन बैरियर पर साफ साफ लिखा था कि आगे रेलवे का कार्य चल रहा। ऐसे में एक सिपाही ही इन प्वांइट पर व्यवस्था संभाल सकता था।