खेतीबाड़ी को यूं ही जुआ नहीं कहा जाता है। बारिश न हो तो नुकसान और ज्यादा भी हो गई तो नुकसान। ऐसा ही कुछ हो रहा है इस साल। सितंबर खत्म होने को है और मानसून की मेहरबानी किसानों के लिए मुसीबत बन गई। बृहस्पतिवार रात को तेज हवाओं के साथ हुई बारिश से किसानों की धान की तैयार फसल जमीन पर बिछ गई। फसल गिरने से धान का दाना काला पड़ने से नुकसान उठाना पड़ सकता है।
पथरी क्षेत्र के ग्रामीण कई हेक्टेयर में धान की फसल उगाते हैं। बासमती, सरबती धान, पूसा बासमती 1509, सरबती पूसा बासमती-1, पूसा बासमती 1121 की फसल लगभग तैयार है। अब जबकि किसान फसल काटने की तैयारी कर रहे थे तो बारिश ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बृहस्पतिवार देर रात को क्षेत्र में हवाओं के साथ हुई बारिश के बाद शाहपुर, बादशाहपुर, शेरपुर, नई कुंडी, भट्टीपुर, नसीरपुर कलां, धारीवाला, टिकौला, हरसीवाला, रानीमाजरा, भुवापुर चमरावल, शिवगढ, फुलगढ, गोविन्दगढ, दुर्गागढ, आदर्श टिहरी नगर, टिहरी डोब नगर, अम्बूवाला, झाबरी, धनपुरा घिस्सूपुरा, पदार्था, बिशनपुर, पुरानी कुंडी, चांदपुर, कटारपुर, फेरुपुर में धान की फसल गिर गई। किसान सरदार करण सिंह, रामेश्वर, भजन सिंह, लक्ष्मण सिंह, जोगेंद्र सिंह, ओमप्रकाश, देशराम सैनी, नीशू सैनी, मोहित सैनी का कहना है कि कुछ ही दिनों बाद धान की फसल की कटाई शुरू होनी है। धान की फसल गिरने से उत्पादन पर असर पड़ेगा और जो दाना होगा वह काला हो सकता है। ऐसे में बाजार में उसके उचित दाम नहीं मिलेंगे।
-----------
धान की फसल गिरने से दाना बड़ा नहीं हो पाएगा और काला भी पड़ सकता है। इसके बाद भी बारिश हुई और खेतों में पानी भरा तो ज्यादा नुकसान होगा।
-डॉ. पुरुषोत्तम कुमार, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र धनौरी
-----------
किसान हमेशा ताकता है आसमान
किसान कभी बारिश नहीं होने पर इस उम्मीद के साथ आसमान ताकत है कि कहीं बादल दिखें और कब बारिश होगी। आजकल किसान आसमान की तरफ इस उम्मीद के साथ टकटकी लगाए है कि आखिर कब मौसम साफ होगा और वह फसल की कटाई कर सके।
--------------------
जंगली जानवर भी पहुंचाते हैं नुकसान
पथरी क्षेत्र के कई गांवों के खेत जंगल से सटे हैं। हाथी राजाजी टाइगर के जंगलों से निकल धान और गन्ने के खेतों में घुस आते हैं और भारी नुकसान पहुंचाते हैं। इसके अलावा नील गायें भी नुकसान पहुंचाती हैं। किसानों से जंगली जानवरों से फसलों को बचाया तो मौसम नुकसान पहुंचा रहा है।