हरिद्वार। हिन्दी भाषा और साहित्य पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता अनुप्रयोग महत्व एवं चुनौतियां विषय पर गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय में तीन दिवसीय व्याख्यानमाला का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम के दूसरे दिन सोमवार को कुमाऊं विवि के प्रो. शिरीष मौर्य ने हिंदी लेखन और एआई का दौर विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि भले ही एआई के कारण कुछ सुविधाएं विकसित हुई हैं, मगर एआई का उपयोग मनुष्य के बौद्धिक व्यायाम और चिंतन में एक बड़ी बाधा उत्पन्न कर रहा है। इसके प्रति सचेत होने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मेधा कभी भी बनावटी नहीं हो सकती है क्योंकि मेधा के विकास की यात्रा मनुष्य के विकास की यात्रा है। समाज, संस्कृति और इतिहास को समझने के लिए मानव मस्तिष्क ही प्रभावी है। एआई केवल वर्तमान और भविष्य के सवालों से संभावित उत्तर दे सकता है।
गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय में हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. मृदुल जोशी ने कहा कि वर्तमान समय में एआई के कारण कई चैटबॉट उपलब्ध हैं। इनकी सहायता से भाषा और साहित्य के विद्यार्थी सूचनाओं का व्यवस्थित उपयोग कर सकते हैं। एआई मूल ग्रन्थों के अध्ययन का विकल्प नहीं बनना चाहिए। प्रो. ब्रह्मदेव ने कहा कि भाषा मनुष्य की चेतना की प्रतीक है। भाषा के माध्यम से सभी को आगे बढ़ना चाहिए। इस दौरान डॉ. अजित तोमर, डॉ. निशा शर्मा, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. रोशन लाल, डॉ. बबीता शर्मा, डॉ. बबलू वेदालंकार आदि मौजूद रहे।