हरिद्वार। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को जूना अखाड़े के मुख्यालय माया देवी मंदिर से प्रसिद्ध छड़ी यात्रा को विधिवत पूजन के बाद रवाना किया। उन्होंने छड़ी कंधे पर लेकर आस्था के साथ महाकाल की भी पूर्जा-अर्चना की। कार्यक्रम में यात्रा को रवाना करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जो यात्रा आदगुरु शंकराचार्य ने जो यात्रा शुरू की, वह श्रीमहंत हरिगिरी ने शुरू कर सनातन संस्कृति को गति दिया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देवभूमि में संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकार सतत प्रयत्नशील है। उन्होंने लैड जिहाद, लव जिहाद, थूक जिहाद आदि का चर्चा की। कहा कि सरकार ने ऐसे तमाम मंसूबों को विफल किया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कई परिस्थितियों से उत्तराखंड गुजर रहा है। बावजूद इसके इस राज्य से जुड़े आस्था और यहां के तमाम चुनौतियों को स्वीकार्य कर उसका समाधान भी किया जा रहा है।
... डरें नहीं बिना स्टेक होल्डर्स को विश्वास में लिए नहीं होगा कॉरिडोर का काम
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक तरफ जहां अयोध्या, उज्जैन और काशी को लेकर संत, श्रद्धालु और स्थानीय लोगों को विकास के लिए तैयार कार्ययोजना की रूपरेखा बताई। वहीं उन्होंने पूर्व में दिए बयान को फिर से दोहराया। इसमें उन्होंने कहा कि बिना स्टेक होल्डर्स की सहमति के कोई भी योजना धर्मनगरी हरिद्वार में लागू नहीं की जाएगी। उनके इस बयान से यह भी स्प्ष्ट हुआ कि वह कॉरिडोर को लेकर कार्य तो करेंगे, लेकिन इसमें सभी के हितों को ध्यान रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने इसमें एक और घोषणा को जोड़ते हुए संत समाज को साधा कि आने वाले 2027 में कुंभ को दिव्य और भव्य बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए विस्तार से समीक्षा वह कर चुके हैं। आने वाले समय में कुंभ की भव्यता को लेकर जो भी कार्य किए जाएंगे वह स्थायी प्रकृति के होंगे। इसमें उन्होंने सहयोग भी मांगा।
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हरिगिरी महाराज ने मांगा पहाड़ पर विकास तो आचार्य और श्रीमहंत ने की सीएम की तारिफ
कार्यक्रम में श्रीमहंत हरिगिरी महाराज ने सीधे तौर पर सीएम पुष्कर सिंह धामी से पहाड़ में विकास की मांग की। उन्होंने कहा कि केदारनाथ के आसपास के क्षेत्रों में मेडिकल कॉलेज, कुमाउं के लिपुलेख में उच्च शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने होंगे। इससे न केवल पहाड़ का पलायन रुकेगा, बल्कि इससे वह लोग जो रहते तो दुर्गम क्षेत्र में हैं, लेकिन शिक्षा और नौकरी के लिए देहरादून आते हैँ उन्हें सुविधा मिलेंगी। महंत हरिगिरी ने कहा कि यदि पहाड़ पर सुविधा विकसित करने में प्रधानमंत्री मोदी की सकारात्मक सोच काम कर रही है तो इसमें प्रदेश सरकार को और अधिक प्रयास करने होंगे। वहीं आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने धर्मसत्ता और राज्य सत्ता के बीच समन्वय को गीता और रामचरित मानस के श्लोक, छंद और सोरठा सुनाकर सीएम को कर्तव्य के प्रति आगाह किया। उन्होंने कहा कि जब राजसत्ता परंपराओं के निर्वहन के प्रति सजग रहता है तो संत उसी सत्ता का संरक्षक और संवाहक बनता है। श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री और स्वयं गृहमंत्री उत्तराखंड की ओर पूरी तन्मयता से ध्यान दे रहे हैं। इसमें संत समाज पूरी निष्ठाा के साथ राज्य सरकार के सहयोग में है। उन्होंने सीएम पुष्कर सिंह धामी को सनातन संस्कृति का संवाहक बताया।
ये संत हुए शामिल
जूना अखाड़े के सभापति श्रीमहंत मोहन भारती, वरिष्ठ सभापति श्रीमहंत प्रेमगिरी, महामंडलेश्वर ललितानंद गिरी, महामंडलेश्वर प्रबोधानंद, महामंडलेश्वर दर्शन भारती, महामंडलेश्वर महेशानंद गिरि, जूना अखाड़े के महामंत्री श्रीमहंत महेश पुरी, श्रीमहंत शैलेंद्र गिरी, राष्ट्रीय सचिव श्रीमहंत ओम भारती, श्रीमहंत कंचन गिरि, श्रीमहंत महाकाल गिरी, श्रीमहंत आदित्य गिरी, नगर विधायक मदन कौशिक, रुड़की विधायक प्रदीप बत्रा, रानीपुर विधायक आदेश चौहान, भाजपा जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा समेत कई अन्य अखाड़ों के संत बड़ी संख्या में मौजूद रहे।