हरिद्वार। त्रिस्तरीय पंचायत सामान्य निर्वाचन के लिए हुए नामांकन पत्रों में आ रही अनियमितताओं और संख्या में लगातार हो रहे फेरबदल से निर्वाचन प्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। जिला पंचायत सदस्य के नामांकन में जांच के दो दिन बाद भी नामांकन निरस्त करने का मामला सामने आया है। जिला निर्वाचन अधिकारी ने इस पर जांच बैठा दी है।
जिला पंचायत सदस्य चुनाव के लिए हुए नामांकन पत्र जोड़, घटाव में उलझकर रह गए हैं। नामांकन पत्रों की संख्या लगातार घटती जा रही है। जहां जांच के बाद नौ दिसंबर को पहले 852 नामांकन पत्रों की सूची जारी की शाम को यह घटकर 850 हो गई। इसके बाद शाम तक 21 नामांकन पत्र निरस्त हुए थे। देर शाम इनकी संख्या बढ़कर 23 हो गई। नया मामला 11 दिसंबर को सामने आया। इस दिन नामांकन पत्रों की वापसी के बाद पांच नामांकन फिर से कम हो गए। पहले जहां पत्रों की जांच के बाद 827 नामांकन पत्र शेष रह गए थे। इसके बाद नाम वापसी 170 के बाद 11 दिसंबर को विभागीय सूची में इनकी संख्या 652 रह गई। जबकि 827 में से 170 पत्र घटाने के बाद संख्या 657 होती है। जिला पंचायत चुनाव के चुनाव अधिकारियों की मानें तो पांच ऐसे नामांकन करने वाले हैं जिन्होंने पिछले चुनाव खर्च का ब्यौरा नहीं दिया था और अपने शपथ पत्र में यह जानकारी छिपाई गई थी। लेकिन शिकायत पर इनके नामांकन पत्रों को निरस्त कर दिया गया है। लेकिन नियमानुसार नौ दिसंबर को नामांकन पत्र निरस्त किए जा सकते थे। इस मामले में जिला निर्वाचन अधिकारी जिलाधिकारी हरबंस सिंह चुघ का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में आया है। इसमें निर्वाचन अधिकारी से लिखित में स्पष्टीकरण तलब किया गया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक गलियारा लाल
जिला पंचायत सहित ग्राम प्रधान, बीडीसी के नामांकन पत्रों में लगातार आ रही अनियमितता और गायब होने पर अन्य राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों ने राज्य सरकार सहित चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। लक्सर विधायक संजय गुप्ता का कहना है कि कांग्रेस की राज्य सरकार लोकतंत्र की हत्या कर रही है। पहले आरक्षण, फिर परिसीमन और अब नामांकन पत्रों में घोटाला। इससे साबित होता है कि कांग्रेस की यह घर की खेती है, लेकिन इसका जवाब जनता देगी। बसपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक शहजाद का कहना है कि उन्हें तो पहले से सरकार एवं शासन की नीयत ठीक नहीं लग रही है। जिस तरह से कार्यप्रणाली अपनाई जा रही है कि बसपा का चुुनाव कांग्रेस से नहीं प्रशासन के साथ है। इन सारी धांधलियों को जनता समझ रही है।