रुड़की। पहाड़ में आई प्रलय से गंगा भी कराह उठी है। गंगा में प्रदूषण इतना बढ़ गया है कि गंगा के हरिद्वार से निकलते ही डुबकी लगाने लायक भी नहीं बची है।
उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) की स्पेशल मानीटरिंग में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। अधिकारियाें का मानना है कि जल प्रलय में बहे लोगों और अन्य चीजों से गंगा ज्यादा प्रदूषित हुई है।
पहाड़ की बारिश गंगा भी कराहने लगी है।
गंगा का पानी वर्तमान समय में बहुत ज्यादा गंदा है। हालत यह हैं कि गंगा डुबकी लगाने लायक भी नहीं बची है। पहाड़ों में आई प्रलय और बड़ी संख्या में लोगों के नदियों में बहने के बाद पीसीबी ने गंगा के प्रदूषण जांचने के लिए स्पेशल मानीटरिंग शुरू की थी। यह मानीटरिंग का काम ऋषिकेश और हरिद्वार में एक साथ किया गया।
दस दिनों तक चली मानीटरिंग के आंकड़े चिंताजनक हैं। हरिद्वार की अपेक्षा ऋषिकेश पानी प्रदूषित होने के आंकड़े कुछ कम रहे, लेकिन वहां भी स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है।
हरिद्वार में जगजीतपुर स्थित मिसरपुर से गंगाजल के सैंपल लेकर जांच की गई। गंगा के पानी में घुलित आक्सीजन को छोड़कर बाकी चीजें मानक से काफी ज्यादा पाए गए हैं। जो शरीर के लिए हानिकारक साबित होते हैं।