रुड़की। गर्मी के मौसम में आग दहक रही है। आंकड़ों पर नजर डाले तो पिछले दस दिनों में 14 जगहों पर आग लग चुकी हैं। जिसमें अभी तक दो लोगों की जान जा चुकी है। जबकि, लाखों रुपये की संपत्ति जलकर राख हो गई है।
मई के शुरू होने के साथ ही आग की घटनाओं ने जोर पकड़ लिया है। अभी मई माह का एक पखवाड़ा भी पूरा नहीं हुआ है और आग की घटनाओं का आंकड़ा 14 हो गया है। आग की घटनाओं के देखते हुए फायर स्टेशन रुड़की के संसाधन नाकाफी नजर आ रहे है। शनिवार तड़के दुकान और मकान में लगी भीषण आग को बुझाने में फायर स्टेशन के संसाधन कम पड़ गए। जिसकी वजह से आग पर काबू पाने में काफी समय लगा।
मौसम शुष्क होने के कारण गर्मी ज्यादा है। शहर में शॉट सर्किट से आग लगने की घटनाएं हो रही है। जबकि, देहात क्षेत्र में पेड़ों के सूखे पत्ते, सूखी घास और झाड़ियों में एक चिंगारी पड़ते ही दहक उठती हैं। अब तक लगी आग में 70 फीसदी से ज्यादा मामले ग्रामीण क्षेत्राेें के हैं।
संसाधन कम, दायरा बड़ा
रुड़की। रुड़की फायर स्टेशन के पास संसाधनों का टोटा है। जबकि, दायरा 40 किमी है। रुड़की फायर स्टेशन के जिम्मे बुग्गावाला, धनौरी, भगवानपुर, कालीनदी, मंडावर, लखनौता, मंगलौर, नारसन, लंढौरा आदि सहित तमाम क्षेत्र है। बुग्गावाला क्षेत्र में यदि किसी गांव में आग लगती है तो वहां पहुंचने के लिए फायर ब्रिगेड को छुटमलपुर होकर जाना पड़ता है। जहां समय से पहुंचना मुश्किल होता है।
फायर ब्रिगेड के संसाधन
आइटम संख्या
फोम टेंडर शून्य (केमिकल आग बुझाने के लिए)
डीसीपी टेंडर शून्य
वाटर टेंडर दो (एक जर्जर हालत में)
रेस्क्यू शून्य
टोईंग व्हीकल एक
पोर्टबल पंप एक
फ्लोटर पंप शून्य
ट्राली एक
जनरेटर एक
एयर कंप्रेशर शून्य
ब्लोवर एग्जाटर शून्य
पिछले वर्षों में लगी आग का ब्यौरा
वर्ष आग की संख्या
2008 90
2009 139
2010 115
2011 94
2012 165
फायर स्टेशन के स्टाफ का ब्यौरा
पद स्वीकृत मौजूद
एफएसओ 01 01
एफएसएसओ 01 01
एलएफएम 04 02
एफएसडीआर 05 03
एफएम 26 23
गर्मी के मौसम में शहरों में शॉट सर्किट और ग्रामीण क्षेत्रों में चिंगारी आदि से आग लगने की ज्यादा घटनाएं बढ़ जाती है। फायर स्टेशन को जैसे ही सूचना मिलती है तो वह तुरंत ही मौके लिए रवाना हो जाती है। फायर ब्रिगेड का पूरा प्रयास रहता है कि वह समय से मौके पर पहुंचे और आग पर काबू पाएं। -बीएल डबराल, प्रभारी एफएसओ, फायर स्टेशन रुड़की।