हरिद्वार। भले ही स्वामी शंकर देव अपनी बीमारी और कर्ज न चुका पाने की पीड़ा से जूझ रहे थे। बावजूद इसके वह अपने शिष्य बाबा रामदेव की तरक्की से खुश थे। लापता होने के बाद उनके कमरे से मिले खत में उन्होंने इस बात का जिक्र किया है।
स्वामी शंकर देव कृपालु बाग आश्रम से 14 जुलाई 2007 को लापता हुए थे। कनखल पुलिस को उनके कमरे से तलाशी के बाद एक पत्र मिला था। मरीज के परचे पर टूटी-फूटी हिंदी में लिखे इस पत्र में शंकर देव ने अपनी बीमारी और कर्ज न चुका पाने का मलाल लिखा है। इसके अतिरिक्त खत में शंकर देव ने अपने शिष्य बाबा रामदेव की तारीफ भी की है। खत में सबसे ऊपर एक लाइन में जिक्र है ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, रामदेव तेरा नाम रहेगा’ लिखा हुआ है। जिस समय शंकर देव लापता हुए देश-दुनिया में बाबा रामदेव के योग का डंका बजना शुरू हो गया था। शिष्य को आगे बढ़ता देख गुरु समझ गए थे कि रामदेव एक दिन खूब नाम कमाएंगे।
गुमशुदगी का मामला अपहरण में दर्ज होने के बाद दोबारा जांच खुलने के साथ ही पुलिस ने पिछले सुबूतों को खंगालना शुरू कर दिया है। जांच अधिकारी महेश चंद्र जोशी ने बताया कि अब नए सिरे से हर पहलू की जांच की जाएगी।