ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
उत्तर प्रदेश कैडर के 25 चिकित्सकों को रिलीव करने के आदेश जारी कर दिए हैं। इनमें से 8 चिकित्सक हरिद्वार के जिला, मेला अस्पताल और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात हैं। इनमें से अधिकांश विशेषज्ञ चिकित्सक हैं। इनके रिलीव होते ही पहले से बेपटरी स्वास्थ्य व्यवस्था औरर चरमरा जाएगी।
उत्तराखंड प्रदेश बनने के बाद यूपी कैडर मांगने वाले कुछ चिकित्सकों को अभी तक रिलीव नहीं किया जा सका है। ये चिकित्सक अपनी वरिष्ठता के अनुसार पद और पदोन्नति मांगते रहे, लेकिन प्रदेश शासन ने इनके लिए कुछ नहीं दिया। ये चिकित्सक लगातार अपनी बातें शासन में रखते रहे, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। अब प्रदेश शासन ने यूपी कैंडर के 25 चिकित्सकों को रिलीव करने के आदेश जारी कर दिए हैं। आदेश सात दिसंबर को शासन से हो गए हैं। आदेश जारी करते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक ने 16 जुलाई-2018 के क्रम में उत्तराखंड राज्य में कार्यरत उत्तर प्रदेश के कैडर के चिकित्सकों को रिलीव कर दिया है। निर्देश में लिखा है कि यदि इन चिकित्सकों पर कोई धनराशि या उपकरण बकाया है तो रिलीव करने से पहले उसकी रिकवरी अवश्य कर लें।
फिजिशियन और सर्जन हैं यूपी कैडर के
पिछले साल जून-2017 के महीने में जिला अस्पताल को 13 साल बाद फिजिशियन डा. संदीप टंडन मिले थे। उनकी तैनाती के बाद अस्पताल आने मरीजों को बहुत राहत मिल रही थी। अब उनके यूपी में जाने से जिला अस्पताल फिर से बिना फिजिशियन के हो जाएगा। जिला अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्सक अरुण कुमार पांडेय सर्जन हैं।
दो पैथोलॉजी और ब्लडबैंक कैसे चलेगा
मेला अस्पताल के वरिष्ठ पैथोलॉजिस्ट डा. एसएन खान जिला अस्पताल की पैथोलॉजी के साथ ब्लडबैंक को भी संभाल रहे हैं। तीनों स्थानों पर डॉक्टर एसएन खान अपनी सेवा दे रहे हैं। यदि वह यूपी के लिए रिलिव हो जाते हैं तो ब्लड बैंक और पैथोलॉजी की व्यवस्था गड़बड़ा जाएगी।
यह है डॉक्टर
जिला अस्पताल में वरिष्ठ सर्जन डा. अरुण पांडेय, फिजिशियन डा. संदीप टंडन, डा. एके पालीवाल, मेला अस्पताल के वरिष्ठ पैथोलॉजिस्ट एवं ब्लडबैंक प्रभारी डा. एसएन खान, त्वचा रोग विशेषज्ञ डा. एचके सिंह, सामुदायिक केंद्र नारसन डा. आलोक सिन्हा, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डा. राजेश वर्मा, एसीएमओ डा. अशोक कुमार।
रहना चाहें तो रह सकते हैं प्रदेश में
रिलीव आदेश में महानिदेशक ने चिकित्सकों को प्रदेश में रहने का विकल्प भी दिया है। आदेश के अनुसार यदि कोई चिकित्सक प्रतिनियुक्ति के आधार पर राज्य में सेवा देना चाहते हैं तो प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं। आवेदन स्वास्थ्य सचिव को कर सकेंगे। लेकिन यदि कोई यहां रहता है तो सेवानिवृत्ति के समय का भुगतान, पेंशन और यूपी के अनुसार 62 साल की सेवा में सेवानिवृत्त कैसे करेंगे। इस संशय को स्पष्ट न करने से कोई भी चिकित्सक रुकना नहीं चाहता है।