अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
छोटे भाई के शव को सरेराह रखने से क्षुब्ध बहन का गंगनहर में कूदने के बाद से उसका कोई पता नहीं चल पाया है। गाजियाबाद से शुक्रवार को यहां पहुंचे पिता ने पथरी पावर हाउस क्षेत्र में बेटी को तलाशा, लेकिन कामयाबी नहीं मिली।
तीन दिन पहले पुल जटवाड़ा से देर रात करीब एक बजे गाजियाबाद के प्रेमनगर निवासी फारुख की बेटी आयशा (18) ने गंगनहर में छलांग लगा दी थी। तब सामने आया था कि फारुख के बेटे ओएश (10) का इलाज चल रहा था और उसकी मौत होने के बाद परिजन शव लेकर गाजियाबाद जा रहे थे, लेकिन एंबुलेंस चालक ने शव पुल जटवाडा के पास सड़क रखकर गाजियाबाद जाने से इंकार कर दिया था। इससे ही क्षुब्ध होकर बहन ने गंगनहर में छलांग लगा दी थी। तब युवती को तलाशने के बजाय परिजन बेटे का शव लेकर गाजियाबाद चले गए थे। बेटे के शव को सुपुर्द ए खाक करने के बाद पिता यहां बेटी की तलाश में पहुंचा।
दिन भर गंगनहर किनारे एवं पथरी पावर हाउस क्षेत्र में पिता अपनी बेटी की तलाशता रहा लेकिन कुछ पता नहीं चल सका। यह सामने आ रहा है कि जब युवती गंगनहर में कूदी थी तब ज्वालापुर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी, लेकिन पुलिस ने मामले में दिलचस्पी लेना जरूरी नहीं समझा था। पुलिस को युवती के गंगनहर में छलांग लगाने के बारे में सूचना होने के बाद भी उसको तलाशने की जहमत नहीं उठाई गई। पिता खुद ही तलाश में जुटा है।
गंभीर रोग का कर रहा था इलाज
बेटे का इलाज यहां एक निजी चिकित्सालय में चल रहा था। यह सामने आया है कि चिकित्सालय का संचालक खुद को बीएएमएस डिग्री धारक बताता है लेकिन वह इलाज गंभीर रोग का कर रहा था। बताया जा रहा है कि मासूम के गुर्दे का इलाज कर रहे चिकित्सक ने कई लाख की रकम इलाज के नाम पर ले ली थी। जब युवती कूदी तब चिकित्सक भी मौके पर पहुंच गया था और परिवार को गाजियाबाद जाने की सलाह दी थी। यह चिकित्सक पहले भी कई प्रकरण में चर्चित रहा है। चिकित्सक के पास मुस्लिम समुदाय के मरीज ही अधिक आते हैं।