हरिद्वार।
हरिद्वार जेल का सिस्टम कैदियों के आगे बौना नजर आ रहा है। ये आलम तब है जब सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत कारागार महकमे के मुखिया हैं। देहरादून में बैठे आला अफसर भी केवल जांच के नाम पर लीपापोती करने में जुटे हैं। आखिर किसी की जवाबदेही क्यों नहीं तय की जा रही है, ये सवाल जस का तस है। हरिद्वार जेल में व्यवस्था की पोल पिछले एक पखवाड़े में खुलकर सामने आ गई है। दो बार कैदियों से मोबाइल फोन बरामद हो चुके हैं।
कैदियों के खिलाफ जेल प्रशासन ने मुकदमे दर्ज करा दिए लेकिन जेल में मोबाइल फोन पहुंचना ही बेहद गंभीर मसला है। जेल में मोबाइल फोन पहुंचने के पीछे का सच सामने आना चाहिए। जेल प्रशासन ने यह जानने की जरूरत नहीं समझी कि आखिर व्यवस्था में छेद कहां है। कैदियों के पास मोबाइल फोन मिलने की बात अभी शांत भी नहीं पड़ी नहीं थी अब तो कैदी का वीडियो ही वायरल हो गया। इसका मतलब यह है कि जेल में कैदियों के पास एक नहीं कई मोबाइल हैं। जब इस कैदी से मोबाइल फोन बरामद हो गया था तो उसका वीडियो बना कैसे और कैसे वायरल हुआ। जेल महकमे के अफसर इतना सब सच सामने आने के बाद भी चुप्पी साधे हैं। एक बंदीरक्षक तक की जवाबदेही तय नहीं की गई है।
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आईपीएस को जेल की कमान, हालात में सुधार नहीं
हरिद्वार। रुड़की गैंगवार कांड के मुख्य आरोपी अमित मलिक उर्फ भूरा जब वेस्ट यूपी में बागपत में पुलिस कस्टडी से फरार हो गया था तब जेल आईजी का पद आईएएस अफसर से छीनकर आईपीएस को सौंपा गया था। आईजी जेल पीवीके प्रसाद बने। पुलिस महकमा हर बार जेल में अपनी पकड़ न होने का रोना रोता था, लेकिन आईपीएस को जेल महकमे की कमान देने के बाद भी हालात में कोई सुधार नहीं आया है। हरिद्वार जिले में कई हत्याकांड का ताना बाना जेल से ही बुना गया, ये दावा खुद पुलिस के अफसर ही करते आए। अब मोबाइल फोन बरामद होने से लेकर वीडियो वॉयरल होने से भी व्यवस्था की बागडोर पर सवाल खड़े हो रहे है।