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देहयात्रा को ही जीवन यात्रा समझना बडी भूल

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार ।
कुुष्ठ पीड़ितों व उनके बच्चों की सेवा के लिए समर्पित दिव्य प्रेम सेवा मिशन की ओर से संचालित वंदेमातरम् कुंज परिसर में मिशन के अध्यक्ष आशीष भैया के सांनिध्य में आत्म संवाद अंतर्यात्रा शिविर के दूसरे दिन दिनचर्या का प्रारंभ ऊॅं ध्यान के साथ हुआ।
ध्यान के प्रथम सत्र में रविराज ने कहा कि हमें अन्त: एवं बाह्य स्थितियों पर नियंत्रण करना पड़ेगा। मनुष्यों का देहयात्रा को ही जीवन यात्रा समझना बड्ी भूल है। कहा कि साधक के जीवन का केंद्र जिज्ञासा है। जिज्ञासा समाप्त होने पर मनुष्य का विकास रुक जाएगा। जिसके अंदर विवेक और श्रद्धा होती है वह मनुष्य होता है, ये दोनों जिसके अंदर होते हैं उसकी साधना फलित होती है। उन्होंने कहा कि शास्त्र हमारे दर्पण हैं। शास्त्रों को पढ़कर हम जीवन मार्ग को साफ करते हैं।
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द्वितीय सत्र में आवर्तन ध्यान, तनाव प्रबंधन विषय पर डा. नितिन अग्रवाल ने कहा कि जो व्यक्ति मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं है, वह शारीरिक रूप से मजबूत होते हुए भी स्वस्थ नहीं है। उन्होंने कहा कि अपनी भावनाओं को अपने निकटतम जनों के साथ साझा करने से तनाव कम होगा। मन, शरीर और मष्तिष्क जब समन्वय बनेगा तो तनाव दूर होगा। शरीर, चेतना और मन के शोधन की आवश्यकता है। अंतिम सत्र में सेवा मिशन के बच्चों ने गणेश वंदना, निर्वाण षटकम, स्वच्छ भारत, सारे जहां से अच्छा, गीत, नाटक, योग एवं नंदा राजजात सहित अनेक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। आयोजकों ने बताया कि तीसरे दिन शिविर में प्रसिद्ध कथावाचक संत विजय कौशल जी महाराज, वृंदावन एवं संजय चतुर्वेदी शिविरार्थियों को संबोधित करेंगे।
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