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शांतिकुंज में दिव्यांग जोड़े परिणय सूत्र में बंधे 16-01-59

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हरिद्वार। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज के संस्कारशाला में दिव्यांग जोड़े ने पवित्र अग्नि को साक्षी मानकर एक दूसरे के गले में वरमाला डालकर सात फेरे लिए। गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या व शैलदीदी की प्रेरणा से दोनों के अभिभावक शादी कराने के लिए सहमत हुए।
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शांतिकुंज के कार्यकर्त्ता सुनीता जन्म से ही दिव्यांग है। सुनीता बोल व सुन नहीं पातीं। उन्होंने स्पीकिंग हेंड्स नेशनल इंस्टीट्यूट, पंजाब से एमसीए, बीएड व एनटीटी की पढ़ाई पूरी की। इस समय सुनीता छत्तीसगढ़ सरकार के शिक्षा विभाग में सेवारत है। इसी तरह ग्राम धनसौली पानीपत, हरियाणा निवासी पूर्ण कश्यप के पुत्र यशपाल भी जन्म से दिव्यांग हैं। वे भी सुन व बोल नहीं पाते। यशपाल भी उच्च प्रशिक्षित हैं और हिमाचल में एक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत हैं। अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या व शैलदीदी की प्रेरणा से दोनों के अभिभावक शादी कराने के लिए सहमत हो गए। शांतिकुंज व्यवस्थापक पंडित शिवप्रसाद मिश्र और बालरूप शर्मा ने वैवाहिक संस्कार का वैदिक कर्मकांड संपन्न कराया। सादगी पूर्व माहौल में हुए इस वैवाहिक उत्सव में शांतिकुंज के कार्यकर्त्ताओं के अलावा हरियाणा, छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों से आए लोगों ने नवदंपति को आशीर्वाद दिया व सफल मांगलिक जीवन की कामना की।
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