ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
वेस्ट यूपी के कुख्यात संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा की जड़ें अब फिर से हरिद्वार में गहरी होती जा रही हैं। जीवा के गैंग से जुड़े हरिद्वार से ताल्लुक रखने वाले नए चेहरे अब उत्तराखंड में गैंग की रीढ़ बन रहे हैं। चर्चा ये है कि हरिद्वार के एक चर्चित होटल को गैंग के कंट्रोल रूम के तौर पर प्रयोग में लाया जा रहा है। कंट्रोल रूम में पहुंचने पर धन्नासेठों की हाजिरी मोबाइल फोन पर वीडियो कॉल के जरिये जीवा के सामने लगवाई जाती है। खास बात यह है कि इस मामले में पुलिस की नींद नहीं टूट रही है।
नब्बे के दशक से जीवा का खौफ हरिद्वार में रहा है। पड़ोसी जिले मुजफ्फरनगर से ताल्लुक रखने वाले जीवा ने जब से पूर्वी उत्तर प्रदेश के माफिया सरगना मुख्तार अंसारी गैंग का हाथ थामा तब से उसका दखल हरिद्वार में कुछ हद तक कम हुआ लेकिन उसकी धमक बरकरार रही। हरिद्वार दिल्ली हाईवे से सटी बेशकीमती भूमि पर उसकी गिद्घ दृष्टि गढ़ी रही। यही वजह रही कि उस भूमि पर स्वामित्व का दावा कर रहे प्रॉपर्टी डीलर सुभाष सैनी पर घर में घुसकर कातिलाना हमला भी जीवा के इशारे पर हुआ था, पर वह बच निकला था।
जीवा के इशारे पर हुए दूसरे हमले में सैनी की बजाय कंबल व्यवसायी अमित दीक्षित उर्फ गोल्डी की जान बेवजह ही चली गई थी। वर्ष 2017 से जीवा ने एक बार फिर से हरिद्वार में अपनी जमीन पहले की ही तरह मजबूत करने की शुरुआत कर दी थी। उसका नतीजा ही है कि जीवा के गुर्गे अब ललतारौपुल के पास एक होटल से गैंग का कंट्रोल रूम बेरोकटोक चला रहे हैं। वे जीवा के नाम से शहर के कई प्रॉपर्टी डीलर, होटल व्यवसायी से लेकर धनाढ्य चेहरों को अपने दरबार में बुलाते हैं और फिर मोबाइल फोन एप्लीकेशन व्हाटसएप के जरिए जीवा से वीडियो कॉल पर आमना सामना कराया जाता है। फिर रंगदारी से लेकर विवादित भूमि से जुड़े मसले सुलझाकर वारे न्यारे किए जा रहे हैं। शहर के बीचों बीच बने चर्चित होटल से चल रहे इस नेटवर्क की भनक स्थानीय पुलिस को बिलकुल नहीं है, ये अपने आप में हैरान कर देने वाली बात ही है।
एसएसपी जन्मेजय प्रभाकर खंडूड़ी ने बताया कि इस बारे में जो भी जानकारी सामने आएगी उसके आधार पर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। किसी को भी माहौल खराब नहीं करने दिया जाएगा।