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अयोध्या में जल्द बने राम मंदिर : मोहन भागवत

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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत का कहना है कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण अतिशीघ्र किया जाना चाहिए। देश का जनमानस राम मंदिर का निर्माण चाहता है। उन्होंने कहा कि संतों ने इस बारे में जो भी कार्ययोजना बनाने की सोची है, उसमें आरएसएस संतों के साथ है। संत जो भी योजना बनाएंगे, उसे सिरे चढ़ाने के लिए सभी मिलकर कार्य करेंगे।
शनिवार को पतंजलि योगपीठ की ओर से नवनिर्मित पतंजलि गुरुकुलम् का शुभारंभ करने आए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर बनना ही चाहिए। इस बारे में समग्र जनमानस की राह स्पष्ट है। कोई भी भिन्न राय नहीं रखता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को मंदिर निर्माण के लिए जल्दी ही पहल करनी चाहिए। हाल ही में साधु-संतों ने राम मंदिर निर्माण के लिए कार्ययोजना तैयार करने की बात कही है। पूरा जनमानस संत समाज के साथ है। भागवत ने कहा कि संत जो भी निर्णय लेंगे हम भी उनके साथ हैं। भगवान श्रीराम को भारत की संस्कृति बताते हुए उन्होंने कहा कि श्रीराम ऐसे महापुरुष थे, जो हिंदू और मुसलमान दोनों के ही पूर्वज हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई यह पूछे की भगवान श्रीराम किस संप्रदाय थे तो कोई क्या जवाब देगा, यही कि वे हर संप्रदाय से ऊपर थे। उनकी आत्मीयता का दायरा इतना था कि वे पूरे जगत के थे। यही वजह है कि सभी उन्हें अपना आदर्श मानते हैं। भगवान राम का मंदिर जल्द बनना चाहिए।
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जमीन नहीं, जमीर का है राम मंदिर मुद्दा : रामदेव
योग गुरु स्वामी रामदेव ने केंद्र सरकार से मांग की है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए संसद में कानून लाकर शीघ्र इसे अमलीजामा पहनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब जनता के सब्र का बांध अब टूटता जा रहा है। राम मंदिर का मुद्दा न तो जमीन हस्तांतरण का मुद्दा है और न ही टाइटल निर्धारित होने का। यह जमीन का नहीं जमीर का मुद्दा है।
शुक्रवार को औरंगाबाद गांव के पास नवनिर्मित पतंजलि के गुरुकुलम् भवन के उद्घाटन समारोह के दौरान पत्रकारों से वार्ता करते हुए योग गुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के अब सिर्फ दो विकल्प बचे हैं। या तो सरकार संसद में कानून बनाए या फिर जनता अपने आप ही मंदिर का निर्माण शुरू कर दे, लेकिन यदि मंदिर का निर्माण जनता खुद करेगी तो यह आरोप लगेगा कि कानून को अपने हाथ में लिया जा रहा है। इससे सामाजिक समरसता बिगड़ने का भी खतरा बना रहेगा। लिहाजा जनमानस की भावना का सम्मान करते हुए केंद्र सरकार को मंदिर निर्माण में देरी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि कोर्ट में सुनवाई के चलते पहले ही इस मामले में बहुत देर हो चुकी है।
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उन्होंने कहा कि जब सरकार अस्पताल, स्कूल, कॉलेज और एयरपोर्ट के लिए जमीन का अधिग्रहण कर सकती है तो राम मंदिर के लिए क्यों नहीं। श्रीराम, भारत की संस्कृति, आत्मा और भारतीय जनमानस के आस्था पुरुष हैं। इस समय केंद्र में भाजपा की सरकार है और देश के अधिकतर राज्य भी भाजपा शासित हैं। ऐसे में अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंदिर निर्माण का प्रस्ताव संसद में लेकर आते हैं तो ऐसा नहीं लगता कि कोई भी उसका विरोध करेगा। क्योंकि देश में हर किसी का विरोध हो सकता है, लेकिन श्रीराम का कोई विरोधी नहीं है।
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