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गुरु ही परमात्मा का दूसरा स्वरूप है : चैतन्य

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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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गुरु ही परमात्मा का दूसरा स्वरूप है, जो भक्तों को ज्ञान की प्रेरणा देकर उनके कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। भगवान ने कार्य करने के लिए ही व्यक्ति को धराधाम पर भेजा है। इसकी प्रधानता से ही व्यक्ति महान बनता है।
ये बातें भूपतवाला स्थित ऊं आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी चन्द्र चैतन्य महाराज ने ब्रह्मलीन स्वामी विवेकानंद सरस्वती महाराज की स्मृति में आयोजित संत समागम में कहीं। उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी विवेकानंद महाराज ने सदैव समाज को एकता के सूत्र में बांधकर उन्नति की और अग्रसर किया। स्वामी ऋषिश्वरानंद महाराज ने कहा कि उन्होंने सदा अपने जीवनकाल में भक्तों को सत्य के मार्ग का अनुसरण कराया और लोक कल्याण के कार्य कर समाज को नई दिशा प्रदान की। स्वामी सत्यव्रतानन्द महाराज ने कहा कि संतों का सम्पूर्ण जीवन अपने भक्तों के जीवन को ज्ञान के प्रकाश से ओतप्रोत कर उन्हें सत्कर्मो की ओर अग्रसर करना होता है। ब्रह्मलीन स्वामी विवेकानंद महाराज संत समाज के प्रेरणा स्रोत थे।
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इस अवसर पर महंत दुर्गादास, स्वामी ज्ञानानन्द सरस्वती, महंत मोहनदास रामायणी, स्वामी चिदविलासानंद, स्वामी जगदीशानंद, स्वामी अखिलेश योगी, स्वामी नरोत्तमानंद, स्वामी बद्री प्रसाद, निरंजन स्वामी, रमेश भाई, मानसिंह भाई, सुरेंद्र वकील, शेर सिंह भाई, अरूण भाई मुछाला, मुकेश भाई सांवलिया, मनोहरलाल शर्मा, दिलीप भाई चावड़ा, प्रेमी भाई लखानी, दीपक माथुकिया, जुगल किशोर, योगेंद्रनाथ तिवारी आदि उपस्थित रहे।
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