सर्वाधिक ठंड से भरा 40 दिनों का चिल्ला शुक्रवार सुबह से शुरू हो जाएगा। हेमंत ऋतु से शुरू हुआ चिल्ला शिशिर ऋतु में संपन्न होगा। कड़ाके की ठंड के दौरान एक महीने चलने वाला माघ स्नान 12 जनवरी पूर्णिमा के दिन से शुरू हो जाएगा।
40 दिनों का चिल्ला तब लगता है जब धनु सक्रांति पर 15 दिन और मकर सक्रांति पर 25 दिन परस्पर जुड़ जाएं। यह हिसाब भारतीय चिंतन में शताब्दियों से चल रहा है। ज्योतिष शास्त्र सहित अनेक पुराणों में भी लोक से जुड़े इस चिल्ले की मान्यता है। यद्यपि शास्त्रों में चिल्ले के नाम अलग- अलग दिए गए हैं। इस बार 30 दिसंबर शुक्रवार को जब चिल्ला शुरू होगा, तब चंद्रमा मकर राशि में प्रविष्ठ हो जाएंगे। चिल्ले के समापन पर सात फरवरी को मिथुन के चंद्रमा रहेंगे। सबसे अधिक ठंड लाने वाली शिशिर ऋतु 14 जनवरी को शुरू होगी। उसी दिन उत्तरायण हो जाएगा।
वर्ष के महीनों में माघ मास का विशेष महत्व है। यह पूरा मास गंगा तट पर बिताने के लिए हजारों श्रद्धालु कुछ दिनों के लिए हरिद्वार में वास करते हैं। जबकि मुख्य कल्प वास करने के लिए लाखों श्रद्धालु प्रयाग पहुंचते हैं। मान्यता है कि 40 दिनों के चिल्ले में हाड़ कंपा देने वाली ठंड पड़ती है। ठंड का यह दौर शुक्रवार से शुरू हो जाएगा।
पायलट बाबा का आध्यात्मिक महोत्सव एक को
महायोगी पायलट बाबा के सान्निध्य में कनखल के योग माता फाउंडेशन की ओर से आध्यात्मिक महोत्सव एक जनवरी को मनाया जा रहा है। इस महोत्सव में अनेक साधु संत भाग लेंगे। यह महोत्सव पूरी वसुधा को कुटुंब बनाने के लिए आदर्शों की स्थापना करेगा। महोत्सव के माध्यम से विभिन्न वर्गों के बीच भाईचारे का संदेश फैलाया जाएगा।