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...गुरुकुलीय शिक्षा पद्धति का विस्तार करेंगे रामदेव

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हरिद्वार।
योग गुरु बाबा रामदेव शीघ्र ही भारत की प्राचीन गुरुकुलीय शिक्षा पद्धति का विस्तार करेंगे। देश के अनेक भागों में हरिद्वार की तर्ज पर आचार्यकुलम खोले जाएंगे। उद्देश्य है कि प्राचीन और आधुनिक शिक्षा साथ-साथ दी जाए।
गौरतलब है कि हरिद्वार के पतंजलि परिसर में अपने तरह के अनूठे आचार्यकुलम शिक्षण संस्थान की स्थापना की गई थी। पूर्ण रूप से आवासीय पद्धति पर आधारित यह संस्थान देशभर में ही नहीं विदेशों में भी लोकप्रिय हुआ है। उसी का परिणाम है कि आचार्यकुलम में पढ़ने के लिए देशभर से छात्र पहुंच रहे हैं। इसी तर्ज पर हरियाणा के साथ-साथ नेपाल में शिक्षण संस्थानों की स्थापना की गई है। पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि आचार्यकुलम की पद्धति को देखने के लिए विदेशों से भी विशेषज्ञ पहुंचे रहे हैं। अनेक देश अपने प्राचीन ज्ञान को आधुनिक शिक्षा से जोड़ना चाहते हैं। भारत जैसा प्राचीन ज्ञान दुनिया में कहीं भी उपलब्ध नहीं है, अत: इसका लाभ केवल भारत ही उठा सकता है। आचार्यकुलम संस्थान का विस्तार देश के सभी राज्यों किया जाएगा। आचार्य ने बताया कि कई राज्य सरकारें ऐसी संस्थाएं अपने राज्य में स्थापित करने की मांग कर चुकी हैं, जो प्राचीन ज्ञान को नई चाशनी के साथ मिलाकर प्रस्तुत कर सके। पतंजलि योगपीठ द्वारा शीघ्र ही ऐसी योजना बनाई जा रही है, जिनके माध्यम से आचार्यकुलम का विस्तार पूरे देश में किया जाएगा।
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आचार्यकुलम की शिक्षा पद्धति प्राचीन और नवीन के मिश्रण पर आधारित है। छात्रों को सवेरे छह बजे से सात बजे तक योग और प्राणायाम की शिक्षा दी जाती है। आठ बजे से प्राचीन पद्धति वाली कक्षाएं प्रारंभ होती हैं। ये कक्षाएं 11 बजे तक चलती हैं। 11.30 से 12.30 तक मध्याह्न भोजन के बाद एक बजे से सायं पांच बजे तक छात्रों को सीबीएसई बोर्ड के माध्यम से शिक्षा दी जाती है। तत्पश्चात बच्चे खेलने चले जाते हैं। रात आठ भोजन के उपरांत शिक्षा के पुर्नावलोकन का प्रबंध है। दस बजे सभी बच्चे शयन पर चले जाते हैं। यह शिक्षा प्रणाली बिल्कुल नवीन है, जो देश में अन्यत्र कहीं भी उपलब्ध नहीं है।
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