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नगर निगम में नया बोर्ड आने से पहले बदल जाएगी सूरत

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। नगर निगम बोर्ड का नया बोर्ड आने से पहले बदहाल नगर निगम की सूरत बदल जाएगी। नया भवन बनने तक के लिए ब्रिटिशकाल के जर्जर कार्यालय भवनों का जीर्णोंद्धार का काम शुरू हो गया है। छतों की मरम्मत से लेकर रंगरोंगन का काम कराया जा रहा है।
नगर आयुक्त नितिन सिंह भदौरिया के निर्देश पर नगर निगम के सभी पटलों (विभागों) के अधिकारियों तथा कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था को दुरुस्त किया जा रहा है। इससे नगर निगम आने वाले नागरिकों को विभागाध्यक्ष तथा संबंधित लिपिकों को ढूंढने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। नगर निगम को पेपरलेस करने की दिशा में भी काम हो रहा है। संपत्तियों तथा संपत्ति कर के रिकार्ड को कंप्यूटरीकृत तथा ऑनलाइन करने पर भी ध्यान दिया जा रहा। सभी जरूरी सेवाओं को ऑनलाइन करने से फाइलों का बोझ कम होगा।
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अपनी प्राथमिकताएं गिनाते हुए नगर आयुक्त नितिन सिंह भदौरिया ने बताया कि सुधारात्मक कदम उठाने से कार्यालयों में काम करने का माहौल बनेगा। अब तक एक टेबल पर चार कर्मचारियों को काम करना पड़ रहा है। इस स्थिति को जल्दी बदल दिया जाएगा। इसके साथ ही सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की 19 करोड़ 34 लाख रुपये की संशोधित डीपीआर को शासन से स्वीकृत कराना, भूमिगत कूड़ाघर (अंडर ग्राउंड डस्टबिन) बनाने साथ ही कंपोस्ट प्लांट के ट्रायल को पूरा कराकर चालू कराना प्राथमिकता में हैं।
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सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की जेएनएनयूआरएम में वर्ष 2008-09 में 16 करोड़ 74 लाख रुपये की डीपीआर स्वीकृत है। जिसके आधार पर केआरएल के साथ अनुबंध 2012 में हुआ था। लेकिन नगर निगम अधिकारियों की लापरवाही तथा राजनीतिक दखलंदाजी से इस योजना को ढर्रे पर लाने में पांच वर्ष से अधिक का समय लग गया है। सेनेटरी लैंडफिल, कंक्रीटयार्ड का विस्तार और ट्रंचिंग ग्राउंड के चारों ओर आठ फीट ऊंची लगभग तीन किलोमीटर लंबी बाउंड्रीवाल का निर्माण को संशोधित डीपीआर में शामिल किया गया, जिससे उसकी लागत बढ़कर 19 करोड़ 34 लाख रुपये हो गई है। जिसको स्वीकृत कराने के लिए नगर आयुक्त प्रयासरत हैं।
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